Saturday, 24th June, 2017
चलते चलते

देखिये, कैसा होगा इन हस्तियों के 'सपनों का भारत':

29, Nov 2016 By बगुला भगत

एजेंसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 50 दिनों में ‘सपनों का भारत’ बनाने का वादा किया है। चूंकि सबके सपने अलग-अलग होते हैं, इसलिये भारत भी एक जैसा नहीं हो सकता। आईये, देखते हैं कि देश की कुछ प्रमुख हस्तियों के ‘सपनों का भारत’ कैसा होगाः

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अपने सपनों के भारत के बारे में सोचते राहुल बाबा

राहुल गांधीः मैं तो भारत में रहना ही नहीं चाहता, सपने गये भाड़ में! मैं तो भारत से बाहर शादी करके चैन से ज़िंदगी बिताना चाहता हूं भैय्या!

केजरीवालः बस जी, उसमें पुलिस मेरे अंडर में होनी चहिये, बाकी और कुछ हो ना हो!

आलिया भट्टः सच्ची बताऊं! मेरे सपनों का भारत वो होगा, जिसकी कोई राजधानी ना हो। क्योंकि अगर राजधानी होगी तो फिर लोग उसका नाम भी पूछेंगे!

अमिताभः हंय..हंय! अपुन अईसा भारत होने को मंगता, जिसमें विज्ञापन छपने बंद ना हों और दो-चार बच्चा लोग को भी मिलता रहे। हंय…हंय!

केआरकेः अपना भारत तो वही होगा, जिसमें कबाड़ की कमाई पे इन्कम टैक्स ना लगता हो।

बाबा रामदेवः बाबा तो बस ऐसा भारत चाहता है, जिसके हर खेत में गेहूं और चावल की जगह आँवला और एलोवेरा पैदा होता हो।

लालू प्रसाद यादवः चुप बुड़बक! अब हमारा नहीं, हमार बचवा लोग- तेजस्वी और तेजप्रताप का सपना पूरा होना चाहिये।

लालकृष्ण आडवाणीः मेरे सपनों के भारत का अब कोई चांस नहीं है। मैं तो बस यही चाहता हूं कि अब किसी और (मोदी) के सपनों का भी ना बने।

रामविलास पासवानः हमारे सपनों का भारत तो बो ही होगा, जिसमें सरकार चाहे किसी की भी हो, बस हमें एक मंत्री पद मिल जाये।

मुलायमः हंवै तौ सपनों का भारत नई, सपनों का राज्य चइयै, जिसमैं मुखमंतरी से लेकै संतरी तक सव अपने यादौ भाई हों और उसमैं सीबीआई ना घुस सकै।

मायावतीः उस देश के कोने-कोने में एक हाथी खड़ा हो, बस! और हां, वहां 1000 और 500 के नोट भी चलते हों।

सनी लियोनीः ओह, माई ड्रीम्स इंडिया! उस इंडिया में ‘मैन-फ़ोर्स’ यानि पुरुष की ताक़त बढ़ती रहे- नये-नये फ्लेवर में- उम्म…उम्म!

अरबाज़-सोहेलः हमारे भाई की पिक्चर 500 करोड़ कमाती रहें, ताकि हमें पॉकेट मनी मिलती रहे।

गौतम गंभीरः टीम इंडिया के ओपनर्स में से किसी एक को चोट लगती रहे।

रतन टाटाः मेरे सपनों का भारत तो वो होगा, जिसमें किसी भी तरह का कोई ‘मिस्त्री’ ना हो- पंचर लगाने वाला भी नहीं!

आम आदमीः इस समय तो हमारे सपनों का भारत वो ही होगा, जिसमें हमें किसी लाइन में ना लगना पड़े…बस!



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