Saturday, 27th May, 2017
चलते चलते

राहुल कुर्ता फाड़ेंगे और मोदी चरखे पर नया कुर्ता बनाएंगे- खादी उद्योग में ख़ुशी की लहर

20, Jan 2017 By khakshar

नयी दिल्ली. पिछले दिनों देश ने दो महत्वपूर्ण घटनाएं देखीं- पहली, चरखे पर सूत कातने की और दूसरी कुर्ता फाड़ने की। लगता है चरखा चलाने और कुर्ता फाड़ने का मौसम दोबारा आ गया है। कुछ सालों पहले अभिनेता गोविंदा और अभिनेत्री रवीना ने स्क्रीन पर कुर्ता फाड़ा था। अब ऋषिकेश की भीषण ठण्ड में कुर्ता फाड़कर राहुल गाँधी ने भी दिखा दिया है कि जवानी का जोश क्या होता है। राहुल कुर्ता फाड़कर बोल रहे थे- “मैं मोदी-मोदी चिल्लाऊँगा कुर्ता फाड़ कर!”

kurta1
अपना फटा कुर्ता दिखाते राहुल गांधी

सूत्र बताते हैं कि अपना कुर्ता फाड़ने वाले कांग्रेसी नेता पहले भी देखे गये हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी पहले कुर्ता फाड़ चुके हैं। हालांकि, इन दोनों नेताओं ने जाप किसी दूसरे नाम का किया था। उनमें से एक राहुल बाबा को राजनीति भी सिखाते हैं। काँग्रेस के इन नेताओं को चौदहवीं बार फिर से उभरते राहुल पर नज़र रखनी चाहिए- जैसे मोहल्ले वाले एक किशोर बालक के चरित्र पर नज़र रखते हैं।

इस बीच, एक पुराने काँग्रेसी नेता ने राहुल गाँधी के कुर्ता-फाड़ कांड को पार्टी और देश के लिए शुभ संकेत बताया है। ये नेता अपनी पार्टी में भी ‘न्यूक्लियर साइंटिस्ट’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। उनका कहना है कि “अगर कांग्रेस के कार्यकर्ता राहुल जी के बताये रास्ते पर चलेंगे तो देश में खादी की बिक्री चौगुनी हो जायेगी। कैलेन्डर में चित्र छपवाने से खादी का कोई कल्याण नहीं होगा। लोग जब तक कपड़े नहीं फाड़ेंगे, तब तक नए खरीदेंगे कैसे?”

कुर्ते की इस एतिहासिक घटना पर बोलते हुए एक और कांग्रेसी नेता ने राहुल को ज़मीन से जुड़ा हुआ नेता बताया। उनका कहना है कि “नोटबंदी के कारण युवाओं की जेब खाली है। और जेब खाली है तो फटेगी ही!”- फ्राँस के ब्रांडेड फैशन हाउस के तीन लाख वाले जैकेट को निहारते हुए वो बोले। सूत्र बताते हैं कि ये राहुल जी का ही जैकेट था, जिसे उन्होंने कुर्ते की फटी जेब दिखाने के लिए त्याग दिया था।

हालाँकि अन्य पार्टियों ने इस ‘कुर्ता फाड़’ हरकत की एक स्वर में निंदा की है। एक सत्ताधारी पात्र, जो ढाई साल बाद भी भी ‘अपोजिशन-मोड’ से नहीं निकल पाए हैं, ने फरमाया कि “इस घटना से समाज में अश्लीलता फैलने का डर है। राहुल जी को अपनी माता जी से पूछना चाहिए कि उन्होंने उनके कुर्ते की मरम्मत क्यों नहीं करायी। काँग्रेस ने पिछले साठ सालों में ऐसे कितने कुर्ते फाड़े हैं, इसका हिसाब देना होगा।”



ऐसी अन्य ख़बरें