Friday, 22nd September, 2017

चलते चलते

'मंत्री बनने के बाद नहीं मिलेगी लाल बत्ती' -यह सुनकर युवा नेता ने छोड़ी पॉलिटिक्स

21, Apr 2017 By Ritesh Sinha

पटना/लखनऊ/बनारस. जब से प्रधानमंत्री मोदी ने ‘लाल बत्ती’ पर बैन लगाने का एलान किया है, पूरे देश में खलबली मची हुई है। जहां, अधिकांश लोग इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, वहीं नेता लोगों की बत्ती गुल है। उनके मुंह ऐसे लटके हुए हैं, जैसे उनके घर की बिजली काट दी गयी हो। स्ट्रगलिंग युवा नेताओं को ‘लाल बत्ती’ के बिना अपना भविष्य अंधकार में दिखायी दे रहा है।

Lal Batti
नंबर प्लेट से पहले लाल बत्ती लग जाती है

नरेश गोयल नाम के एक युवा नेता ने गले में पड़ी पांच तोले की चेन को एडजस्ट करते हुए कहा कि “अगर नेता बनकर भी लालबत्ती लगाने का मौका नहीं मिलेगा, तो फिर पॉलिटिक्स में आने का फायदा ही क्या! इससे तो अच्छा था कि हम इंजीनियर ही बन जाते। लेकिन अब उसका भी चांस गया क्योंकि एज ज़्यादा हो गयी है।”

यूथ कांग्रेस (जी हाँ! ये जीव अभी भी पाए जाते हैं!) के प्रदेश अध्यक्ष चिंतामणि चौरसिया जी ने बताया कि “यह फैसला पूरी तरह युवा विरोधी है, हम इसकी घोर निंदा करते हैं। ई बुढ़ऊ लोग ने खुद ने तो मज़ा लूट लिया और जब हमारी बारी आई तो अचानक इन्हें VIP कल्चर बुरा लगने लगा। अरे! इस लाल-बत्ती के चक्कर में तो हम पालिटिक्स में आए थे। सोच रहे हैं कि कुछ जुगाड़-वुगाड़ करके इंजीनियर ही बन जायें!” -चिंतामणि जी ने अपनी चिंता प्रकट की।

वहीं, भारतीय जनता युवा मोर्चा के युवा नेता आशुतोष नागपाल ने बताया कि “इसमें मेरी ही गलती है जो मैं राजनीती में आ गया, वरना पापा तो कॉलेज में पैसा देने को तैयार थे। सोचा था कि एक दिन लाल बत्ती में चलेंगे, टोल टैक्स वाले को पीटेंगे, लेकिन सब पर पानी फिर गया। अगर यही सब चलता रहा, तो देखना पॉलिटिक्स में सब बूढ़े-बूढ़े लोग ही नज़र आएँगे। कौन आएगा भाई अपनी जवानी बरबाद करने यहाँ!”

उधर, टोल प्लाजा के कर्मचारी भी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। लगभग पांच बार विभिन्न नेताओं से मार खा चुके, एक अनुभवी टोल कर्मचारी ने बताया कि “पहले हम लाल-बत्ती देखते ही, मार खाने से बचने के लिए हेलमेट वगैरह पहन लेते थे। लेकिन अब तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी, हम नेताजी की गाड़ी को पहचानेंगे कैसे? लगता है अब दोगुना मार खाना पड़ेगा।”



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