Monday, 23rd April, 2018

चलते चलते

स्वीडन-वासी दिन में बस 6 घंटे ही करेंगे काम, सुनते ही सरकारी बाबू ने कहा- "बिच प्लीज़"

23, Jan 2018 By Pagla Ghoda

नई दिल्ली: घरेलू नृत्यकला प्राधिकरण (घ.न.प्र.) विभाग के सरकारी बाबू घंटेश्वर नाथ गोरारे उर्फ़ घंटा बाबू अभी सुबह की चाय की चुस्कियाँ लेते लेते फ़ाइलें उठाकर इधर से उधर रख ही रहे थे कि बाजू में बैठे मंगलू चपरासी ने अपने आइफोन 8 पर एक रोचक ख़बर पढ़ के सुनाई। ख़बर का शीर्षक था- “स्वीडन-वासी अब दिन में केवल 6 घंटे ही करेंगे काम!” ये सुनते ही घंटा बाबू को इतनी ज़ोर की हँसी आयी कि उनके मुँह में भरी सारी चाय निकल गयी और वो मंगलू को डाँटने लगे।

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खाली पड़ीं सरकारी दफ़्तर की कुर्सियाँ

घंटा बाबू: अबे मंगलू, तुम सुबह-सुबह लतीफ़े मत सुनाया करो यार! इतनी ज़ोर से हँसा दिया कि पूरी चाय शर्ट पे जा गिरी है।

मंगलू: लेकिन घंटा बाबू स्वीडन के लोग अब दिन में केवल 6 घंटे ही काम कर सकेंगे, मतलब कि सरकार जो है, उसने ही ये रूल बना दिया है। कितनी अच्छी बात है, यहाँ भी ऐसा रूल बन जाए तो मज़ा आ जाए!

घंटा बाबू: (चिढ़ाते हुए) मज़ा आ जाए? अबे यार मंगलू तू तो अव्वल दर्जे का कामचोर है, तू वैसे भी आधे घंटे से ज़्यादा काम नहीं करता दिन में।

मंगलू: देखो घंटे बाबू चाहे माँ-बहन की गाली दे लो हमको, पर कामचोर नहीं कहना, हम इस मामले में थोड़े टची हैं। और ये भी याद रखो कि सरकेटेश्वर बाबू ने भी हमारे काम को ले के काफ़ी कॉमेंट बाज़ी की थी पिछले साल, और उसके दो महीने बाद ही उनका तबादला आसाम हो गया था, वो हमने ही करवाया था।

घंटा बाबू: (हकपकाते हुए) अरे…अरे मंगलूराम जी, आप तो खामखां नाराज़ हो गए, मैं तो यूँ ही चुटकी ले रहा था। आप तो पिछले पैंतीस सालों से यहाँ काम कर रहे हैं। हमारे बुज़ुर्ग हैं, इस पूरे डिपार्टमेंट में आप सरीखा होनहार, मेहनती, ईमानदार, इज़्ज़तदार, लबाबदार, …. मेरा मतलब के समझदार इंसान कोई और है ही नहीं। कोई नया अफ़सर यहाँ ज्वाइन करे तो चाहे कितना भी बड़ा अफ़सर क्यों न हो, उसे सबसे पहले आपके चरण छू के आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए, काफ़ी तरक़्क़ी करेगा।

मंगलू: (शर्माते हुए) ठीक है अब बस भी कीजिए! लेकिन ये बताइए कि आप ख़बर सुन के हँसे क्यों?

घंटा बाबू: भाई वो इसलिए के हमारे डिपार्टमेंट में तो वैसे भी कोई आधे-एक घंटे से ज़्यादा काम नहीं करता दिन में। आपको छोड़ के मेरा मतलब, आप तो बाहुबली हैं। यानी के स्वीडन की सरकार लोगों की भलाई के लिए जो नियम ला रही है, वो नियम यहाँ लोग पहले से ही फ़ॉलो करके अपनी भलाई कर रहे हैं। इसके लिए तो मैं फ़ेसबूक पे सीखा एक शब्द कहूँगा, “बिच प्लीज़!”

मंगलू: हा-हा…बात तो सही बोलते हो घंटे बाबू। यहाँ अगर कोई नियम आना चाहिए तो ये आना चाहिए के लोग कम से कम छह घंटे तो काम करें एक दिन में!

घंटा बाबू: अरे धीरे बोलो यार, आप भी ना, अगर बड़े साहब ने सुन लिया ना, तो अगले एक हफ़्ते तक ओवरटाइम में रुकवाएँगे।

मंगलू: तो अच्छा है ना, ओवरटाइम का तीन सौ रुपया रोज़ का पाओगे।

घंटा बाबू: कोई फ़ायदा नहीं साहब। एक हफ़्ता ओवर टाइम करेंगे, इतने में तो बीवी नाराज़ होके बच्चों को लेके मायके निकल लेगी। वो भी फिर ऊबर ओला से नहीं, महँगी वाली टैक्सी से जाती है और उसी से वापिस आती है। और फिर पीछे से खाना भी कैटीन का गंदा थोड़े ही खाएँगे, बाहर से फ़ासोस या स्विगी से ऑनलाइन मंगाना पड़ेगा, उसका ख़र्चा अलग! ओवरटाइम की पगार तो दूर, ऊपर से दो-ढाई हज़ार अलग लग जाएँगे। अभी-अभी नयी BMW ख़रीदी है, उसकी किश्तों का बोझ पहले से ही है।

मंगलू: किश्तों में क्यों ली भाई? मेरे बेटे ने अभी ऑडी ली है, मैंने पूरा डाउन पेमेंट कर दिया, पूरा सात पर्सेंट डिस्काउंट भी मिला।

घंटा बाबू: अब यार आप तो बाहुबली हैं, इतने सालों से लोगों की सेवा कर रहे हैं, हमें तो अभी टाइम लगेगा।

मंगलू: ये तो है…

घंटा बाबू: अच्छा मंगलराम जी आपने वो जुनेजा ऐंड मूतनेजा वाली फ़ाइल्स डिपार्टमेंट से मँगवा ली थी।

मंगलू: क्या?

घंटा बाबू: (फुसफुसाते हुए) साहब आ रहे हैं।

मंगलू: ओह, हाँ घंटेश्वर जी, बस आप सारे कोटेशन चेक कर लीजिए, नहीं तो हमें काफ़ी नुक़सान हो सकता है।

घंटा बाबू: जी, वो मेरे काम में तो कभी आपको एक पर्सेंट का भी एरर नहीं मिलेगा। मेरा हर काम टॉप क्लास…

मंगलू: बस…बस…चले गए साहब!

घंटा बाबू: और मैं तो ISRO के साइंटिस्ट से भी ज़्यादा … अच्छा चले गए, चलो बढ़िया है, अब दो घंटे बाहर नहीं आएँगे, चलिए बाहर से थोड़ा पान-वान खा के आते हैं।

मंगलू: नहीं कल रात ब्लू बर्ड बार में काफ़ी ज़्यादा हो गयी थी, मैं सोच रहा हूँ कि तीन घंटे घर सो के आ जाऊँ।

घंटा बाबू: बिलकुल…बिलकुल, आप जाइए, साहब पूछेंगे तो मैं बोल दूँगा के आप दूसरी बिल्डिंग से फ़ाइल कलेक्ट करने गए हैं।

मंगलू: भला हो आपका। धन्यवाद!



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