Tuesday, 16th January, 2018

चलते चलते

गुजरात चुनावः वोटों की गिनती दिखाने वाली वेबसाइट्स को ब्लॉक किया प्राइवेट कंपनियों ने

18, Dec 2017 By Guest Patrakar

गुरुग्राम. गुजरात चुनाव के रिजल्ट वाले दिन आज सिर्फ़ कांग्रेसी नेताओं के ही चेहरे नहीं लटके हुए थे, ज़्यादातर प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के मुँह भी सूजे हुए थे। वजह- मल्टीनेशनल कंपनियों के नये फ़रमान के मुताबिक़, आज घोषित हुए इन नतीज़ों को इन कंपनियों के लोग नहीं देख पाये। इसके लिए ना केवल ऑफ़िसों में न्यूज़ चैनल ब्लॉक कर दिये गये बल्कि अन्य न्यूज़ वेबसाइट और वे सारी वेबसाइट्स भी ब्लॉक कर दी गईं, जहाँ पर रिज़ल्ट दिखाए जा रहे थे। हालाँकि कामचोरी और चाटुकारिता प्राइवेट कंपनियों के एम्पलॉइज में भी भरपूर होती है।

bad mood in office
ऑफ़िस में मुँह लटकाये बैठा नितिन महाजन

यह फ़ैसला लिया गुरुग्राम स्थित ‘अखिल भारतीय एम्प्लॉइज ख़ून पीयो कमेटी’ ने, जिसे हर MNC और प्राइवेट कम्पनी को मानना पड़ा। लेकिन क्या वजह थी ऐसा फ़ैसला लेने की? इसके बारे में हमें बताया गुरुग्राम के ही एक MNC के मालिक सूरज बिशनोय जी ने। उनका कहना है कि “हर बार की तरह इस बार भी लोग चुनाव के नतीजों का लुत्फ़ ऑफ़िस में उठाने की सोच रहे थे। लेकिन हमने ऐसा नहीं होने दिया!”

“और इसका सबसे बड़ा एक कारण है कि इस बार नतीजे किसी अन्य दिन की बजाय सोमवार को आ रहे थे और हम नहीं चाहते कि लोग सोमवार के दिन ख़ुशी मनायें। अगर ऐसा हुआ तो MNC और सरकारी दफ़्तर में फ़र्क़ ही क्या रह जाएगा? इसका एक और बड़ा कारण यह भी है कि हमारे दफ़्तर में कई लोग जो पूरे साल शक्लें नहीं दिखाते, वे भी चुनाव के नतीजे देखने के लिए ऑफ़िस चले आते है। क्योंकि घर पर तो बीवी चुनाव जैसी बोरिंग चीज़ देखने नहीं देती और बाहर नाई की दुकान पर TV देखने की प्रथा तो कब की बंद हो चुकी है। बस ऐसे ही लोगों को लाइन पर लाने के लिए ही हमने और अन्य MNC कम्पनीयों ने यह क़दम उठाया है।” -बिशनोय ने चहकते हुए कहा।

हालाँकि कई लोगों में इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा भी दिखाई दिया लेकिन बोलने की हिम्मत किसी की नहीं है। हमने इस फ़ैसले में कई कर्मचारियों से बात की और उनकी राय ली। पुणे की एक MNC में काम करने वाले नितिन महाजन का कहना था कि “यह सही नहीं हुआ है। जब पूरे दिन ऑफ़िस के लोग TV पर स्टॉक्स देखने के बहाने रिपोर्टरों को ताकते हैं, तब कोई TV बंद क्यूँ नहीं कराता? यह ज़रूर किसी भाजपा विरोधी बंदे का निर्णय होगा।”

एक और व्यक्ति सुयश शर्मा ने कहा, “मैं तो वैसे भी काँग्रेस समर्थक हूँ। अच्छा हुआ कंपनी ने यह फ़ैसला ले लिया। खामखाँ सबके सामने हारने पर EVM पर इल्ज़ाम लगाने पड़ते। इसलिये मैं इस फ़ैसले का समर्थन करता हूँ।” कई लोगों का यह भी कहना है कि अभी तो चुनाव है इसलिए चुप बैठे हैं लेकिन अगर यह हरकत कोई बॉस भारत-पाक के मैच वाले दिन कर देता तो उसके टकले सर पर TV फोड़ देते।

लेकिन ऑफ़िस में एक तबका ऐसा भी है, जिसे इस फ़ैसले से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता और वो है ऑफ़िस का महिला वर्ग और HR डिपार्टमेंट! जिन्हें आज भी यह मालूम नहीं है कि देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कौन है। ख़ैर, आक्रोश कितना भी हो लोगों ने कहीं ना कहीं इस फ़ैसले को मंज़ूर कर लिया है। उन्होंने मान लिया है कि थोड़ा लेट ही सही लेकिन घर जाकर ही नतीजों का आनंद लेंगे। अब ये नतीजे कोई EVM तो है नहीं जो बटन दबाया और बदल गए!



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