Tuesday, 25th July, 2017
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"भारत में दलित बने सबसे ताक़तवर, किसी की हिम्मत नहीं हो रही सामने खड़ा होने की" -यूएस रिसर्च

23, Jun 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली/न्यू हैवन. ‘लोग कहते रहते हैं कि हिंदुस्तान में दलितों की हालत ख़राब है, दलितों पर अत्याचार होते हैं, जबकि सच्चाई इसके एकदम उलट है। और सच्चाई ये है कि वहाँ दलित इतने पावरफ़ुल हो गये हैं कि आज कोई और उनके सामने खड़ा होने की हिम्मत भी नहीं कर पा रहा। भारत में हो रहे राष्ट्रपति चुनाव में यह बात एक बार फिर से साबित हो गयी है।’- यह दावा किया गया है अमेरिका की प्रसिद्ध येल यूनिवर्सिटी की एक हालिया रिसर्च में।

Ram-Nath-Kovind
इन दोनों के सामने आने की हिम्मत नहीं किसी में

येल के ‘सेन्टर फ़ॉर एशियन स्टडीज’ के डायेक्टर पीटर सैंडर्स ने इस रिसर्च को कल रात सार्वजनिक किया। इस मौक़े पर सैंडर्स ने कहा कि  “कुछ लोग कहेंगे कि यह सरासर झूठ है! तो एक बात बताओ! राष्ट्रपति से बड़ा तो कुछ नहीं होता ना! ना हमारे यहाँ और ना इंडिया में!” फिर रिसर्च के पन्नों पर नज़र डालते हुए बोले, “और उस चुनाव में कौन-कौन लड़ रहे हैं? दोनों के दोनों दलित! तो इसका मतलब है कि किसी और की हिम्मत नहीं है उनके सामने खड़ा होने की!”

रिसर्च के अनुसार, जब रामनाथ कोविंद प्रेसिडेंट बनने के लिये सीना ठोक कर खड़े हो गये तो इंडिया में किसी ऊपर की जाति वाले की हिम्मत नहीं हुई उनके सामने आने की! लेकिन कहते हैं कि लोहे को लोहा काटता है और दलित को भी सिर्फ़ एक दलित ही काट सकता है। इसलिये एक अन्य दबंग दलित मीरा कुमार ने कहा कि “अगर किसी और में दम नहीं है तो मैं लड़ूँगी कोविंद के ख़िलाफ़! लेकिन इसे वॉक ओवर नहीं दूँगी!”

ये वही मीरा कुमार हैं, जो अपने दबदबे के चलते कई योग्य सवर्ण प्रत्याशियों का हक़ मारकर लोकसभा की स्पीकर बनी थीं और देश के छंटे हुए नेताओं को “बैठ जाईये…बैठ जाईये” कहकर ज़बरदस्ती चुप करा देती थीं। लोकसभा में किसी की हिम्मत नहीं होती थी उनके सामने चूँ करने की!

रिसर्च के अंत में कहा गया है कि राष्ट्रपति चुनाव ही क्यूँ! इंडिया में दलितों का इतना दबदबा है कि वे जहाँ से भी चुनाव लड़ने के लिये खड़े हो जाते हैं, किसी और की हिम्मत नहीं होती उनके सामने खड़े होने की। फिर कोई दूसरा दलित ही आता है उससे टक्कर लेने!



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