Thursday, 19th January, 2017
चलते चलते

आठ नवम्बर से पहले के दिनों को याद कर रोया जेबकतरा- "क्या ज़माना था वो भी"

14, Nov 2016 By Pagla Ghoda

मुम्बई. नरीमन पॉइंट के इनर जंक्शन के सभी प्रोफेशनल जेबकतरे इस समय काफी सदमे में हैं। कारण ये है कि जितने भी पॉकेट आजकल मारे जा रहे हैं, उनमें पुराने वाले पांच सौ और हज़ार के नोट ही मिल रहे हैं जो अब जेबकतरों के भी किसी काम के नहीं रहे। इस वजह से पॉकेटमारों का अब किसी के पिछवाड़े की ओर देखने का मन भी नहीं कर रहा।

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मजबूरी में एक फॉरेनर का पर्स मारते सन्नी बाबू

जेबकतरा राइट्स एसोसिएशन (JERA) के वाइस प्रेजिडेंट और कोलाबा के मशहूर जेबकतरे सन्नी बाबू ‘सनसने’ ने बताया कि “कुछ साल पहले जब ये क्रेडिट कार्ड आया तो हमें लगा कि अब कोई कैश नहीं रखेगा और हमारा धंधा बंद हो जायेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। लोगों के पास उसके बाद भी भयंकर मात्रा में कैश रहता था, जिसमें से कुछ हमारे लड़के भी मारते रहते थे। तीन या तीन से ज़्यादा हज़ार के नोटों से भरा पर्स मारने वाले को हम “गोल्डन पिकपॉकेट ऑफ़ द वीक” का अवॉर्ड भी देते थे और हमारी सीक्रेट वेबसाइट पे उसका फोटू भी लगाया जाता था।”

फिर सन्नी ने ठंडी आह भरते हुए कहा, “क्या ज़माना हुआ करता था आठ नवम्बर से पहले! लेकिन अब जबसे मोदी जी ने ये नोट बंद करवाये हैं, हमारे मंथली रेवेन्यू नंबर तो बिलकुल डाउन हैं। अब तो जो ‘फील्ड एसोसिएट’ (जेबकतरा) पांच सौ या हज़ार से भरा बटुआ मारके लाये उसे गालियां ही पड़ रही हैं। सौ-सौ के नोट मारने वाले हीरो हो गये हैं। अजीब टैम आ गया है जन्नलिस्ट भाई!”

अपने आईफोन सेवन पर उंगली फिराते हुए सन्नी बाबू आगे बोले, “अभी कुछ टैम पहले फिनलैंड और ऑस्ट्रेलिया से हमारे कुछ फॉरेनर जेबकतरे फ्रेंड इंडिया टूर पे आये थे। हमने उन्हें अपने पूरे आपरेशन का ब्यौरा दिया था। यही नहीं, हमारे ऑन ग्राउंड वाले छोकरे उन्हें फील्ड ट्रिप पर भी लेके गए थे जहाँ हमने उन्हें इंडिया में ‘ऑन द जॉब’ पॉकेट कैसे मारी जाती है उसके गुर भी सिखाये थे। हमें शाब्बाशी देते हुए वो लोग बोले कि हमारे तरीके फॉरेन में जेब काटने के तरीकों से बहोत एडवांस हैं। मुझे तो एनुअल बोर्ड मीटिंग में काफी वाहवाही भी मिली थी क्योंकि मेरे रेवेन्यू नंबर सबसे अग्रेसिव थे। गर्व से सीना फूल गया था मेरा। परंतु अब तो सब ठंडा है।” बोलते-बोलते सन्नी बाबू का गला भर आया और आँखें नम हो गयीं।

तभी अचानक उन्होंने इंटरव्यू ख़त्म करने की इजाज़त मांगी और बोले, “अभी-अभी व्हाट्सएप आया है कि एक लड़का दो-दो हज़ार के नोटों से भरा एक बटुआ मार के लाया है। लाखों का माल है तो उसे शाब्बाशी देने खुद फील्ड में जा रहा हूँ, इससे लड़का लोग का मनोबल बढ़ता है।”



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