Thursday, 14th December, 2017

चलते चलते

सोसायटी के कई पैरेंट्स आपस में भिड़े, सबने कहा- "मेरे बेटे को बिगाड़ रहा है तुम्हारा बेटा"

04, May 2017 By Ritesh Sinha

भोपाल. हर माँ-बाप को लगता है उसके बेटा-बेटी को किसी दूसरे ने ही बिगाड़ा है। ऐसी ही एक घटना शांति उपवन सोसायटी में हो गई जब वहां के रहने वाले कुछ पैरेंट्स ने दूसरों पर ये आरोप लगाना शुरू कर दिया कि उनके बेटे को किसी दूसरे के बेटे ने बिगाड़ा है। ये झगड़ा एक छोटी सी बात को लेकर दो लोगों में शुरू हुआ था, लेकिन थोड़ी ही देर में इसमें बहुत सारे लोग जुड़ते चले गए।

शर्मा जी के लड़के के साथ तिवारी जी का लड़का
शर्मा जी के लड़के के साथ तिवारी जी का लड़का

हुआ यूँ कि, मोहल्ले के कुछ सदस्य शर्मा, तिवारी, गुप्ता, चौधरी जी वगैरह शाम को टहलने निकले थे। वे सभी बहुत पुराने दोस्त थे, और एक दूसरे की मदद भी किया करते थे। टहलने के दौरान ही तिवारी जी ने अपने बेटे के बारे में कहा कि “अपना गुन्नू UPSC की तैयारी कर रहा है, लेकिन जब देखो लफंगों के साथ घूमता रहता है। कई दिन तो कोचिंग भी नहीं जाता। घर में भी तो पढना चाहिए ना! लेकिन जनाब को तो बस बाइक चाहिए।”

इतना सुनते ही साथ चल रहे शर्मा जी भड़क गए और बोले “क्या तिवारी तू भी! तेरा गुन्नू, मेरे बेटे के साथ ही तो घूमता है, इसका मतलब तू मेरे बेटे को लफंगा कह रहा है।” शर्मा जी ने बस इतना ही कहा था कि तिवारी जी आग बबूला हो उठे। थोड़ी ही देर में दोनों के बीच जोर-जोर से बहस होने लगी। “अरे मेरे गुन्नू को तो तेरे बेटे ने ही बिगाड़ा है, मैं डंके की चोट पर कहता हूँ। सिगरेट पीना भी उसी ने ही सिखाया है, वरना लाखों में प्यारा था मेरा गुन्नू! जब देखो तब तेरे बेटे के साथ ही घूमता रहता है। तू अपने बेटे की बहुत तरफदारी करता है ना! मैं सब जानता हूँ उसके बारे में।” -तिवारी जी ने तमतमाते हुए कहा।

“अच्छा! उल्टा चोर कोतवाल को डांटे! देख तिवारी, मेरे बेटे ने तेरे गुन्नू को नहीं बल्कि तेरे गुन्नू ने मेरे बेटे को बिगाड़ा है,एक नंबर का मवाली है वो! काम का ना काज का, दुश्मन अनाज का। अरे वो क्या UPSC क्रैक करेगा, उसे घूमने से फुरसत मिले तब ना! खुद तो नप गया है, दूसरों के भोले-भाले लड़कों को भी अपना जैसा बना रहा है।”- शर्मा जी ने गुन्नू को आड़े हाथों लेते हुए कहा।

इस बीच, सही मौका पाकर इस बहस में चौधरी और वर्मा जी भी शामिल हो गए। उन्होंने भी यही आरोप लगाया कि उनके बेटे को किसी ने बिगाड़ दिया है। झगड़ा और बढ़ गया। अब सब ऊँगली दिखा-दिखाकर एक दूसरे को गरियाने लगे। हल्ला होता हुआ देखकर इन सब की पत्नियाँ भी घटना स्थल पर पहुँच गईं, और झगड़े को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। एक दूसरे को कोसते-कोसते जब सभी थक गए तब जाकर झगड़ा शांत हुआ।

इस लड़ाई को शुरू से अपनी आँखों से देखने वाले रामाधीर सिंह ने बताया कि “अरे! बहुत मज़ा आ गया आज तो। पहले साहब लोग लड़ रहे थे, फिर थोड़ी देर बाद मैडम लोग भी लड़ने लगीं। मैं तो यहीं खड़ा था, मज़े ले रहा था।” हालाँकि, अब तक ये खुलासा नहीं हुआ है कि उनके बच्चों को किसने बिगाड़ा है?



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