Monday, 23rd April, 2018

चलते चलते

'पद्मावत' के थिएटर में आगज़नी करने घुसा युवक, केवल 500 का पॉपकॉर्न बेचने वाली मशीन को जलाकर लौटा

22, Jan 2018 By Pagla Ghoda

जैसलमेर. पद्मावत के थिएटर में तोड़-फोड़ का मन बनाए युवक शम्भू मूर्खारी की आखों में तब एक तीव्र ज्वाला दहक उठी, जब उसने सिनमा में घुसते ही पॉपकॉर्न बेचने वाली मशीन को देखा। उसने उसी वक़्त पेट्रोल डालकर उस मशीन को जला डाला और उसके तुरंत बाद ग़ुस्से में फुनफनाते हुए थिएटर से बाहर निकल गया। बाद में ग़ुस्सा ठंडा होने पर उसने हमारे संवाददाता पगलूराज से बात की।

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काले घेरे में शम्भू मूर्खारी

शम्भू ने कहा, “अबे हम गए तो थे के पूरा थिएटर ही फूँक देंगे साला। लेकिन जैसे ही उस मशीन को हमने देखा ना भैया, हमारे तन-बदन में काफ़ी ज़ोरों से आग लग गयी। और हमने फूँक दिया उसको! अब तुम पूछोगे क्यों भाई? तो हुआ ये था के तीन महीना पहले हम पलक मैडम को ले के सनिमा देखने यहाँ पे ही आए थे और वो पाप-कॉर्न चबाने की ज़िद करने लगीं। अब लेडीज़ हैं और बेस्ट फ़्रेंड है हमारी पिछले कई हफ़्तों से, तो मना तो नहीं कर सकते थे ना! पूरे पाँच सौ रुपय्ये की चपत लगा दी इस कमबख़्त पापी-कॉर्न ने!”

“पूरे दो महीने का पॉकेट मनी है भैया हमारा! बाऊजी से और रुपया माँग भी नहीं पाए थे, क्योंकि उनका अभी-अभी बवासीर का आपेरसन हुआ है। दो महीने कैसे गुज़ारा किया है, सिर्फ़ हमें मालूम है। रिक्शा तक चलाए हैं रात में मुँह पे कपड़ा बाँध के!” कहते-कहते शम्भू का गला भर आया।

जब उनसे पूछा गया कि “वो तो पूरा थिएटर जलाने निकले थे फिर उन्होंने क्यों केवल मशीन जलाकर ख़ुद को रोक लिया?”, तो शम्भू थोड़े दार्शनिक मोड में आ गए। दूर कहीं देखते हुए बोले, “उस कमबख़्त मशीन को जलता देख के, उसमें पड़े पॉपकॉर्न को फड़फड़ाते हुए, तड़पते हुए देख के जी को एक शांति सी मिली भैय्या। फिर लगा के बस अब सब कुछ अचीव कल लिया है हमने, अब बस हिमालय चले जाएँ। बस हम फिर एक ट्रान्स मुद्रा में आ गए और निकल लिए वहाँ से। पेट्रोल, कपास, सालिया गारा मिट्टी सब वहीं छोड़ दिया। अब हमारी कुछ और जलाने की इच्छा नहीं थी। और सच कहें तो हम तो किसी सेना-ऊना को भी बिलोंग नहीं करते हैं, सब-कांशियस तौर पे शायद हम वही मशीन जलाने गए थे सनीमा!”



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