Thursday, 21st September, 2017

चलते चलते

प्रधानमंत्री मोदी के इज़रायल दौरे का सपोर्ट कर रहे हैं एकतरफ़ा प्यार के शिकार हुए युवक

04, Jul 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री मोदी आज से इजरायल के दौरे पर हैं, और इस दौरे को लेकर दोनों देशों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इसी बीच, इस दौरे से जुड़ा हुआ एक चौंका देने वाला खुलासा हुआ है। देश भर में कराए गए एक सर्वे में पता चला है कि वे युवा, जो एकतरफा प्यार के शिकार हुए हैं, वे लोग इस दौरे का कुछ ज्यादा ही सपोर्ट कर रहे हैं। दरअसल, इश्क में जो जख्म इन्हें मिले थे, उन जख्मों पर यह दौरा मलहम का काम कर रहा है।

Modi Tour
इज़राएल के इकतरफ़ा प्यार को मिल गया रेस्पॉन्स

“ये युवक प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे से इतना ज्यादा खुश क्यों हैं?”, ऐसा पूछे जाने पर सर्वे करने वाली संस्था के प्रेसिडेंट मजनूं चौटाला ने बताया कि “देखिए! इजरायल ने पिछले 50 सालों में भारत की जमकर मदद की है, केले और सेब के रेट पर हथियार दिए हैं, युद्ध के समय हमारा पक्ष लिया है, और हर मंच पर हमारा साथ दिया है। इसके बावजूद भारत ने कभी भी इज़रायल को घास नहीं डाली। वो प्यार के कबूतर छोड़ रहा था, और हमने कभी कोई रेस्पॉन्स नहीं दिया। पूरा-पूरा एकतरफा प्यार का मामला है भाईसाब!”

“बस, यही बात इन चोट खाए आशिकों को पसंद आ गई, क्योंकि इनकी भी हालत भारत-इजरायल के रिलेशन जैसी ही है। बेचारों ने अपनी ओर से जमकर कोशिश की थी, लेकिन उन बेवफा लड़कियों ने कोई जवाब ही नहीं दिया।”

ऐसे ही एक दिलजले आशिक, विजय देवगन ने बताया कि “क्या बताऊँ! जब से सुना है कि मोदीजी इजरायल जाने वाले हैं, मुझे मेरा पहला प्यार याद आ गया है!” फिर पुराने दिनों को याद करते हुए विजय ने बताया कि- “क्या नहीं किया मैंने उसके लिए, अपनी बाइक पर घुमाया, बैलेंस डलवाया, महंगा गिफ्ट दिया..सब कुछ किया। लेकिन एक दिन उसने कह दिया कि ‘मैंने कभी तुम्हें उस नज़र से देखा ही नहीं!’ -कहता हुआ विजय अपने आंसू पोछने लगा।

“खैर! हमारी तो किस्मत ही खराब थी, कोई बात नहीं। अब मोदीजी इजरायल जा रहे हैं तो हमें बहुत ख़ुशी है। देर से ही सही, कम से कम सामने वाली पार्टी ने रेस्पॉन्स तो दिया, हमें तो इतना भी नसीब नहीं हुआ था।”- कहते हुए वो फिर से भें..भें करके रोने लगा। उधर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू प्रोटोकॉल तोड़कर प्रधानमंत्री मोदी को लेने एअरपोर्ट आ रहे हैं। इससे सिद्ध होता है कि ‘प्रोटोकॉल’ तोड़ने के लिए ही बनाए जाते हैं।



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