Wednesday, 13th December, 2017

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शराब खरीदने के लिये पत्नी से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट' लेना ज़रूरीः सुप्रीम कोर्ट

03, Apr 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. देशवासियों को शराब जैसी बुरी चीज़ से दूर रखने के लिये सुप्रीम कोर्ट नये-नये तरीक़े ढूंढ रहा है। इसी कड़ी में उसने आज एक नया आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा गया है कि शराब खरीदने वाले के पास उसकी पत्नी का ‘नो ऑब्जैक्शन सर्टिफ़िकेट’ होना होना अनिवार्य है। अगर पत्नी की ओर से जारी ‘एनओसी’ नहीं होगा तो एक बूंद शराब नहीं मिलेगी।

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एनओसी के लिये पत्नी के सामने गिड़गिड़ाता पति

इस ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ में पत्नी द्वारा यह घोषणा होनी चाहिये कि “मुझे अपने पति के शराब पीने पर कोई आपत्ति नहीं है, कृपया इन्हें बीयर/रम/व्हिस्की की…..बोतल/कैन देने की कृपा करें।” फ़ॉर्म पर नीचे पत्नी के हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान होना चाहिये।

सर्वोच्च न्यायालत को उम्मीद है कि इस फ़ैसले के बाद शराब के सेवन में भारी कमी आयेगी क्योंकि दुनिया में शराबी के रास्ते में अगर कोई सबसे बड़ी बाधा है तो वो पत्नी ही है। एनओसी लेने के लिये पति-पत्नी में रोज़ दो-तीन घंटे बहस होगी। इतने में ठेका बंद होने का टाइम हो जायेगा। और कुछ पति तो इतने ख़ुद्दार हैं कि वे पत्नी के आगे गिड़गिड़ाने के बजाय शराब छोड़ना पसंद करेंगे।

इस फ़ैसले के बाद सबसे ज़्यादा मुश्किल उन पतियों को होने वाली है, जो रोज़ पीते हैं। पत्नी से रोज़-रोज़ एनओसी लेना लगभग असंभव है। हालांकि कोर्ट ने डेली ड्रिंकर्स को छूट देते हुए कहा है कि “वे चाहें तो पत्नी से एक साथ पूरे महीने का परमिट ले सकते हैं।”

“लेकिन जिनकी पत्नी नहीं है, वे एनओसी कहां से लायेंगे?” इस पर माननीय जज साब ने कहा कि “वे अपने पापा, बड़े भाई या फूफाजी-मौसाजी से मिला एनओसी दिखाकर ‘सामग्री’ खरीद सकते हैं।” उधर, कुछ लोगों को आशंका है कि इस फ़ैसले की आड़ में पत्नियाँ अपनी जायज़-नाजायज़ मांगें मनवा सकती हैं। एनओसी देते टाइम वे अपनी मांगों की लिस्ट सामने रख सकती हैं।



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