Wednesday, 13th December, 2017

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भगवा संगठनों की मांग: 'मदर्स डे' का नाम बदल कर 'करण-अर्जुन दिवस' रखा जाए

14, May 2017 By Pagla Ghoda

जबलपुर. एमपी के सबसे मशहूर युवा संगठन ‘कम्प्यूटर वाहिनी सेना’ (कंवासे) ने सरकार से माँग की है कि युवाओं को पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से बचाने के लिए ‘मदर्स डे’ का नाम बदल कर ‘करण-अर्जुन दिवस’ किया जाए। कंवासे के प्रदेश अध्यक्ष पैंतालीस वर्षीय युवा, श्री जनावरलाल चंडेल ने अपना फ़ोन चेक करते हुए बताया, “अज़ी आज का युवा कम्प्यूटर, फ़ोन और टीवी जैसे पाश्चात्य संसाधनों से प्रभावित होकर अपनी पौराणिक संस्कृति भूल रहा है। और हमारी कम्प्यूटर वाहिनी सेना ही ऐसे भूले-भटके छोकरों को बड़े प्यार से लाइन पे लाने का पवित्र कार्य कर सकती है।”

Karan-Arjun
“मदर्स डे पर मेरे करण-अर्जुन आ गये”

“इसलिए हम आज सरकार को ये आदेश देते हैं…मेरा मतलब कि माँग करते हैं कि इस विदेशी ‘मदर्स डे’ का नाम बदलकर तुरंत स्वदेशी ‘करन-अर्जुन दिवस’ कर दिया जाए। वैसे, पहले हमने सोचा कि इसे ‘मातरु दिवस’ का नाम दिया जाए, लेकिन फिर लगा कि ये नाम छोकरों के बीच पापुलर नहीं होगा। करन-अर्जुन सनीमा से प्रेरित नाम है, हिट रहेगा। स्वर्गीय रामाधीर सिंह जी सही कह गए हैं कि जब तक देश का नौजवान सनीमा का दीवाना रहेगा, देश का कुछ नही होगा। लेकिन मेरी पूछिए तो मैं तो इन सभी फ़ारनेर चीज़ों से नफ़रत करता हूँ।” कहकर श्री चंडेल अपना आईफ़ोन 7 निकाल कर अपने गैंग के लोगों से स्काइप चैट करने लगे।

सोशल साइंस के प्रख्यात विशेषज्ञ श्री जनताप्रसाद कौमुखी ने भी इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “देखिए बर्दर, ये एक दुखियारी माँ की दर्दभरी पुकार ही थी जो करण-अर्जुन जैसे वेल्लों को मृत्यु के पश्चात भी वापिस ले आयी थी। तो ये नाम तो मदर्स डे के लिए बढ़िया जंचता है, पर विचार किया जाए तो नाम और भी हो सकते हैं। जैसे ‘सोनिया गांधी दिवस’, ‘निरूपा रॉय दिवस’ इत्यादि चूँकि ये लेडीज़ भी अपने माँ वाले रोल को बख़ूबी निभाने के लिए जानी जाती रहीं हैं। वैसे ‘अंजलीना जोली डे’ भी बुरा नहीं है, क्योंकि श्रीमती जोली भी दुनिया जहाँ के अलग-अलग जाति प्रजाति के बच्चों की माँ बनने के लिये मशहूर हैं।”

इस दिन का नाम मदर्स डे ही रहेगा या बदलकर कुछ और हो जाएगा ये तो अभी तय नहीं है पर ताज़ा ख़बरों के अनुसार ‘गेम अव थ्रोंज़’ के फ़ैन्स भी अब माँग उठा रहे हैं कि ‘मदर ऑफ़ ड्रैगंज़’ की याद में इस दिन का नाम खलीसी दिवस रखा जाए।



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