Wednesday, 26th July, 2017
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फ़तवे की रकम 100 रुपये से ज़्यादा न रखी जाए, ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल का बड़ा फ़ैसला

20, Apr 2017 By Pushpendra Singh

देवबंद. आज तड़के आनन-फानन में बुलाई गयी बैठक में ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल के सभी मेम्बरान ने फतवे देने की प्रक्रिया में बड़ा सुधार किया है। उलेमा काउंसिल ने एलान किया है कि फतवे की रकम किसी भी हाल में 100 रुपये से ज़्यादा नहीं होनी चाहिये। इस फ़ैसले में कहा गया है कि सर मुंडवाने जैसे छोटे कामों के लिए 50 रुपये का फ़तवा वैलिड होगा, तो वहीं सर कलम करने जैसे गंभीर फ़तवों के लिए अधिकतम 100 रुपये ही दिए जाएंगे।

Ulema
फ़तवों पर फ़तवा देते उलेमा काउंसिल के सदस्य

यह महत्वपूर्ण फ़ैसला मौलवियों की आर्थिक हालत और सोनू निगम के मुंडन वाले घटनाक्रम को देखते हुए लिया गया है। बैठक में शामिल सभी उलेमा इस बात से बेहद आहत थे कि बंगाल के सैयद शाह क़ादरी 10 लाख रुपये वाले अपने फ़तवे को पूरा नहीं कर पाये और पूरी दुनिया में उनकी मिट्टी पलीद हो गयी।

यह मामला दुनिया में अपनी तरह का पहला मामला है क्योंकि अब से पहले जो भी फ़तवे दिये जाते रहे हैं, वे कभी पूरे नहीं होते इसलिये उनमें बोली गयी रकम को चुकाने की नौबत कभी आती ही नहीं! इसलिये भविष्य में ऐसी फ़ज़ीहत से बचने के लिये उलेमाओं को यह नियम बनाना पड़ रहा है। उलेमा काउंसिल के सदस्यों का मानना था कि फ़तवे देने के लिए भी एक आचार संहिता होनी चाहिए। “अगर ऐसा नियम पहले बन गया होता तो ना तो सैयद क़ादरी इतना लंबा फ़तवा छोड़ते और ना उन्हें ऐसी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता!” – यह कहना था उलेमा काउंसिल बोर्ड के चेयरमैन सैयद मोहम्मद हसनी का।

उधर, जहाँ अधिकांश मौलवियों ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है तो वहीं कुछ लोगों ने इसे फ़तवे देने की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया है। उनका मानना है कि सस्ते रेट की वजह से लोगों की फ़तवों में दिलचस्पी कम हो जायेगी और मीडिया में पब्लिसिटी भी नहीं मिलेगी।



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