Monday, 25th September, 2017

चलते चलते

प्रधानमंत्री मोदी की एक और उपलब्धिः गुजरात के लोगों को पहली बार दिखाया जापानी आदमी

13, Sep 2017 By बगुला भगत

अहमदाबाद. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के लोगों को आज एक और एतिहासिक तोहफ़ा दिया, जिसे वो शायद पूरी ज़िंदगी ना भूल पायें! मोदी जी आज जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे को अहमदाबाद लेकर पहुँचे और उनके साथ रोड शो किया। आबे का रोड शो कराने का उनका एक ही मकसद था- गुजरात के लोगों को जापानी आदमी की झलक दिखाना! आबे की झलक देखते ही अहमदाबाद के लोग खुशी से चिल्ला उठे।

BJP-Abe Modi
‘पहली बार’ दो प्रधानमंत्रियों का रोड शो,देखा है कभी?

इस रोड शो से और भी कई वर्ल्ड रिकॉर्ड बने। दुनिया का यह पहला रोड शो है, जिसमें एक साथ दो प्रधानमंत्रियों ने भाग लिया। यह उपलब्धि कितनी बड़ी है, इस बात का अंदाज़ा इसी बात से हो जाता है कि दुनिया के कई देशों में तो रोड शो होने अभी शुरु भी नहीं हुए हैं। इस उपलब्धि से भारत की स्थिति दुनिया में और मजबूत हो गयी है। इसके साथ ही, पाकिस्तान और चीन को भी एक बार फिर कड़ा संदेश चला गया है।

इसके अलावा, यह रोड शो जापानी प्रधानमंत्री आबे के लिये भी एतिहासिक है क्योंकि उन्होंने अपनी ज़िंदगी में इससे पहले कभी कोई रोड शो नहीं किया था। इसके लिये उन्होंने मोदी जी का आभार जताया है और उनसे वादा किया है कि अब वो भी जापान में हर साल कम से कम एक रोड शो ज़रूर किया करेंगे।

“मोदी जी, आबे को अहमदाबाद की सड़कों पे क्यों घुमा रहे हैं, क्या गुजरात चुनाव की वजह से?” -एक रिपोर्टर के इस सवाल पर गुजरात बीजेपी के एक नेता ने कहा कि “चुनाव से इसका कोई लेना-देना नहीं है। मोदी जी तो ये सब ग़रीब लोगों के लिये कर रहे हैं।” “ग़रीब लोगों के लिये मतलब?” -रिपोर्टर ने हैरानी से पूछा।

“देखो भैय्या, जो पैसे-धेले वाले लोग हैं, वे तो जापान जाकर ही जापानियों को देख लेते हैं। लेकिन ग़रीब गुजरातियों का क्या? अगर उनका किसी जापानी बंदे को देखने का मन हो तो वो कैसे देखे? इसीलिये मोदी जी अपना सारा सुख-चैन छोड़कर आबे को घुमा रहे हैं।” -यह कहकर नेताजी रोड शो के काफ़िले के पीछे दौड़ पड़े।

अब, कल मोदी-आबे बुलेट ट्रेन का शिलान्यास करेंगे, जिसमें लाखों लोगों के मौजूद रहने की संभावना है। इस शिलान्यास के साथ भी कई चीज़ें ‘पहली बार’ होंगी। दुनिया में पहली बार कोई शिलान्यास जनता के सामने होगा, क्योंकि दूसरे देशों में तो सिर्फ़ फ़ाइल वगैरह पर हस्ताक्षर करके ऐसे ही काम चालू कर देते हैं।



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