Sunday, 17th December, 2017

चलते चलते

बोलने की आज़ादी मांगने वालों पर भड़के मनमोहन सिंह, कहा- "ज़्यादा बोलकर क्या करोगे?"

06, Mar 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. बोलने की आज़ादी मांगने वाले लोग केंद्र सरकार की नाक में दम किये हुए हैं। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि उन्हें बोलने की आजादी में 200 ग्राम की कमी भी मंजूर नहीं है। इन प्रदर्शनों से केंद्र सरकार बैकफुट पर है और उसे समझ नहीं आ रहा कि वो क्या करे। ऐसे मुश्किल हालात में मोदी सरकार के लिए एक राहत की खबर आई है।

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हज़ार शब्दों से अच्छी है इनकी ख़ामोशी

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बोलने की आजादी मांगने वाले इन प्रदर्शनकारियों की जमकर निंदा की है। बिना बोले एक बयान जारी करके उन्होंने कहा है कि “बोलने की आज़ादी के लेवल को बढ़ाने की अभी कोई आवश्यकता नहीं है, जितना है वो भी ज़्यादा है। जो लोग इसे बढ़ाने के लिए फालतू में आन्दोलन कर रहे हैं मैं उनकी बिना बोले निंदा करता हूँ।”

बाद में मनमोहन सिंह ने, फ़ेकिंग न्यूज़ के ‘बहुत कम’ बोलने वाले रिपोर्टर से विशेष बातचीत की। उन्होंने बताया कि- “मुझे समझ नहीं आता कि ये लोग ज्यादा बोलकर क्या कर लेंगे? मुझे देखो! मैं बिना बोले पीएम हाउस में दस साल निकाल गया कि नहीं! और ये लोग बोलने के लिये मरे जा रहे हैं। मूर्ख!”

इस बीच, इतना बड़ा वाक्य एक साथ बोलने की वजह से उन्हें खांसी आ गई। उन्होंने एक गिलास पानी पिया और आगे बोले – “मैं तो मोदी जी से कहना चाहूँगा कि बोलने की आजादी को और ना बढ़ाएं। बल्कि मैं तो कहता हूँ कि मौका देखकर उसे बिल्कुल ही ख़त्म कर दिया जाए।” -बिना अपने शरीर को हिलाते हुए ही वे बोले।

“लेकिन मोदी जी ने तो आपके बारे में रेनकोट वाला बयान दिया था, फिर आप उनकी मदद क्यों कर रहे हैं?” ऐसा पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि “हाँ! उस बयान की वजह से मैं बहुत हर्ट हुआ था। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मैं कान पका देने वाले लोगों का समर्थन करूँगा। राजनीति अपनी जगह है। लेकिन इस मामले में मैं मोदी जी के साथ हूँ।”

मनमोहन सिंह जी ऐसा कह ही रहे थे कि तभी टीवी पर मोदीजी आ गए, जो कई दिनों से यूपी की रैलियों में बोल रहे हैं। मोदीजी को देखते ही वो टेंशन में आ गए और बोले- “लो, ये आ गये गये भाईसाब! अब कम से कम एक घंटे तक पकाएंगे।” -यह कहकर उन्होंने पास में रखी रुई उठाई और उसे अपने कानों में ठूंसने लगे।



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