Wednesday, 22nd November, 2017

चलते चलते

सरकारी फॉर्म में धर्म के आगे 'कट्टर' लगाना हुआ अनिवार्य, नहीं तो फॉर्म होगा रद्द

04, Jul 2017 By नास्त्रेदमस

नयी दिल्ली. जिस तरह धार्मिक लोगों में दिन-ब-दिन कट्टरता बढ़ती जा रही है, उसको देखते हुए भारत सरकार ने एक बड़ा फ़ैसला किया है। अब सभी सरकारी फ़ॉर्म्स में जहाँ भी धर्म का कॉलम भरना पड़ता है, वहाँ अपने धर्म के आगे ‘कट्टर’ लगाना अनिवार्य कर दिया है। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे, तो आप का फ़ॉर्म रद्द कर दिया जायेगा। हालांकि, अगर आप चाहें तो आप धर्म के कॉलम को खाली छोड़ सकते हैं, जिससे ये मान लिया जायेगा कि आप किसी भी धर्म को नहीं मानते, लेकिन अगर धर्म को मानते हो तो ‘कट्टर’ शब्द हर हाल में लिखना ही होगा।

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अपने-अपने धर्म का कट्टरता से पालन करते लोग

इस बारे में हमने देश की जनता की राय जानने की कोशिश की और अलग-अलग धर्मों के नौजवानों से बात की। दिल्ली के एक युवक राम कुमार ने कहा कि “यह बिलकुल सही है, मैं भी एक कट्टर हिन्दू हूँ और अपने धर्म का कट्टरता से पालन करता हूँ।” जब हमारे रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि “आप किस प्रकार कट्टरता से अपने धर्म का पालन करते हैं?” इस पे वो कुछ देर सोच में पड़ गया और फिर बोला कि “जैसे की मैं आ..आ.. जैसे कि मैं रोज़ाना कम से कम पाँच ‘जागो हिन्दुओ जागो’ वाले व्हाट्सप्प मैसेज आगे फॉरवर्ड करता हूँ।”

वहीं, फैज़ाबाद के सलीम ने हमें बताया कि उसे भी धर्म के आगे ‘कट्टर’ लगाने से कोई ऐतराज़ नहीं हैं। उसने कहा कि “मैं एक कट्टर मुसलमान हूँ और फेसबुक या व्हॉट्सएप पे कभी किसी गैर-मुसलमान को उनके त्यौहार पे विश नहीं करता, यही मेरी कट्टरता का राज़ हैं।”

इन दोनों के उलट, कुछ युवक, जिनकी संख्या बहुत कम है, अभी तक कंफ्यूज हैं कि कट्टरतापूर्वक धर्म का पालन कैसे करें! उनका कहना है कि वे रोज़ मंदिर या मस्जिद जाते हैं और धार्मिक किताबों का भी उन्हें ज्ञान है, पर ‘कट्टर’ से सरकार का क्या मतलब है, यह उन्हें समझ नहीं आ रहा है। पर जैसा कि हमने कहा कि ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है। अधिकांश युवक अपनी धार्मिक कट्टरता को अच्छे से समझ पा रहे हैं और रोज़मर्रा के जीवन में उसका पालन भी कर रहे हैं।

राजनैतिक गलियारों में भी सभी पार्टियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। सेक्युलर पार्टियों का कहना है कि जब तक देश का अल्पसंख्यक समुदाय कट्टरतापूर्वक अपने धर्म का पालन कर पा रहा है, हमें इस फैसले से कोई ऐतराज़ नहीं है। वहीं, कुछ क्षेत्रीय पार्टियों ने सुझाव दिया है कि जातियों के लिए भी हमें ये कदम उठाना चाहिए। अगर कोई अपनी जाति के आगे ‘कट्टर’ नहीं लगाता तो उसका आधार कार्ड कैंसल कर के उस पे 50% जीएसटी लगा देना चाहिये।



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