Saturday, 18th November, 2017

चलते चलते

मुंबई के 'राम मंदिर' स्टेशन पर पहुंच गये भगवान राम, नाम की वजह से हो गये कन्फ्यूज

09, Feb 2017 By बगुला भगत

एजेंसी. मुंबई की लोकल ट्रेन से चलने वाली कुछ सवारियों ने दावा किया है कि उन्होंने कल रात भगवान राम को ‘राम मंदिर’ स्टेशन की बेंच पर लेटे हुए देखा। स्टेशन पर देर रात उतरने वाले इन लोगों ने बेंच पर किसी रहस्यमयी इंसान के लेटे होने की बात मानी है। इनका कहना है कि बेंच के नीचे धनुष जैसी कोई चीज़ भी पड़ी थी।

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‘राम मंदिर’ बनाकर विजयी चिन्ह बनाते बीजेपी नेता

एक चालीस की लास्ट लोकल से आये हितेश सांघवी नाम के पैसेंजर ने फ़ेकिंग न्यूज़ को बताया कि “भगवान जी अपना मंदिर ढूंढते-ढूंढते अयोध्या की जगह ग़लती से यहां स्टेशन पर पहुंच गये होंगे। उन्हें पता नहीं होगा कि बीजेपी ने इस नाम का रेलवे स्टेशन बनाया है, ना कि मंदिर!”

स्टेशन पर वड़ा पाव का स्टॉल लगाने वाले रमाशंकर पांडे ने भी याद करते हुए कहा कि “हां, हमसे किसी ने आकर पूछा था कि दिन भर में कितना प्रसाद बांट लेते हो बच्चा? हमने कह दिया कि ये प्रसाद नहीं अंकल, वड़ा पाव है, दस रुपये का! लेना है तो लो नहीं तो अपना रस्ता लो!”

अब जब से रमाशंकर ने ये भगवान राम वाली बात सुनी है, वो डर के मारे थर-थर कांप रहा है। उसके बाजू में खड़े एक पैसेंजर ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा “जो लोग 30 साल से भगवान राम के नाम पे मलाई मार रहे हैं, जब उनका कुछ नहीं बिगड़ा तो तुम क्यों डर रहे हो!”

वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि स्टेशन का नाम ‘राम मंदिर’ होने से हमें रोज़ सुबह-शाम मंदिर जाने की सी फीलिंग हो जाती है। हम ट्रेन में बैठे-बैठे ही पुण्य कमा लेते हैं।

इस बीच, भगवान राम इस घटना से बेहद आहत बताये जा रहे हैं। उन्हें लगता है कि बीजेपी वाले उन्हें इसलिये हल्के में ले रहे हैं क्योंकि वो अपना मंदिर ना बनने पर कोई हंगामा तो कर नहीं रहे, जैसे जाट-गुज्जर रिज़र्वेशन ना मिलने पर कर देते हैं। लेकिन अब उन्होंने बीजेपी को अल्टीमेटम देने का मन बना लिया है कि “बस, बहुत हो चुका! मुझे एक फ़ाइनल डेट दे दो। वरना मैं किसी दूसरी पार्टी से बनवा लूंगा।” इस पर कुछ सवारियों का कहना है कि शायद भगवान जी को मालूम नहीं है कि गच्चा देने में इस देश की सारी पार्टियां उस्ताद हैं।

उधर, बीजेपी ने अपने नेताओं से इस मुद्दे को चुनावों में कैश करने को कहा है। पार्टी का कहना है कि “जिस तरह युधिष्ठिर ने ‘अश्वत्थामा मारा गया’ ज़ोर से कहा था और ‘परन्तु मनुष्य नहीं पशु’ धीरे से, उसी तरह वे अपनी रैलियों में ‘राम मंदिर बन गया’ ज़ोर से बोलें और ‘परंतु मंदिर नहीं स्टेशन’ धीरे से बोलें।”



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