Monday, 20th November, 2017

चलते चलते

बिहार में भीषण राजनीतिक बाढ़ः लालू बहे, नीतीश सुरक्षित, भाजपा बचाव कार्य में जुटी

27, Jul 2017 By Ritesh Sinha

पटना. वैसे हम नहीं चाहते कि बिहार में बाढ़ आए, लेकिन आजकल वहाँ एक दूसरे ही किस्म की बाढ़ आई हुई है। कल शाम को चार बजे के आस-पास जब लालू यादव ने कहा कि “सब ठीक चल रहा है!” तभी लग गया था कि “सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है!” इसके कुछ घंटे बाद ही नीतीश बाबू अचानक राज्यपाल के पास पहुँच गए और उन्होंने अपना इस्तीफ़ा उन्हें सौंप दिया।

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डूब रहे लालू और सुरक्षित बचकर निकलते नीतीश

फिर क्या था, बिहार की राजनीति में बाढ़ आ गई। यह बाढ़ कोसी नदी की बाढ़ नहीं थी, बल्कि ‘कोसने’ वालों की थी। बिना वक़्त गंवाए भाजपा ने बचाव कार्य शुरू कर दिया और रैपिड एक्शन फ़ोर्स की तरह नीतीश को समर्थन देने का एलान कर दिया। मोदी जी ने भी आनन-फानन में ट्वीटर के रास्ते एक ‘नाव’ पटना के लिए रवाना कर दी। नाव का नाम था- ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई’! नीतीश कुमार और सुशील मोदी इसी नाव पर चढ़कर बाढ़-ग्रस्त इलाके से सुरक्षित बाहर निकल आए हैं और टिकाऊ सरकार भी बना ली है।

बाढ़ से हुई हानिः इस बाढ़ का सबसे ज्यादा नुकसान ‘लालू एंड कंपनी’ को हुआ है। तेज़ बहाव में तेजस्वी यादव की कुर्सी बह गई, साथ ही लालू यादव की ज़मीन-ज़ायदाद को भी भारी नुकसान हुआ है। जीतन राम मांझी का मुख्यधारा से संपर्क टूट गया है, उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। अवार्ड लौटाने वालों का पता नहीं चल रहा है, और कुछ पत्रकारों को भी हल्की चोटें आई हैं। राहुल गाँधी अपनी पार्टी को हुए नुकसान का जायजा लेने जल्द ही बिहार का हवाई सर्वेक्षण करने वाले हैं।

बाढ़ से लाभः चूँकि ये एकदम दूसरे किस्म की बाढ़ है, इसलिए इससे कुछ लोगों को फायदा भी हुआ है। सुशील कुमार मोदी को बैठे-बिठाए ख़ज़ाना हाथ लग गया है, और वो फूले नहीं समा रहे हैं। नीतीश कुमार पहले ही राशन-पानी लेकर छत पर चढ़ गए थे, इसलिए उन्हें भी कोई नुकसान नहीं हुआ है। इस बाढ़ के फलस्वरूप मोदी सरकार केंद्र में और मज़बूत हो गयी है।



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