Sunday, 17th December, 2017

चलते चलते

म्यांमार जा कर फिर से भारत आएंगे कश्मीरी पंडित, UN का ध्यान खींचने में मिल सकती है मदद

23, Sep 2017 By Pushpendra Singh

जम्मू : २७ साल से अपने ही देश में रिफ्यूजी की तरह रह कर अपने ही देश से उपेक्षा की मार झेल रहे कश्मीरी पंडितो ने अब म्यांमार का रुख कर लिया है । जी नहीं , उनका मकसद देश छोड़ना नहीं बल्कि म्यांमार के ज़रिये वापस भारत में घुसना है । उनका मानना है की म्यांमार के रास्ते वापस देश में घुसने से मीडिया और मानवाधिकार संगठनो का ध्यान उन पर ज़रूर जाएगा। कश्मीरी पंडितो को ये तरीका ज़्यादा सुगम और कारगर नज़र आ रहा है ।

Kashmiri-Hindu-Refugees-Protest-For-Justice-of-the-Genocide-they-Facedदिल्ली के रिफ्यूजी कॉलोनी में रहने वाले नरोत्तम कौल बताते है कि उन्हें यहाँ रहते हुए २७ साल हो गए पर आज तक कभी किसी बड़े मीडिया चैनल को उनकी सुध लेते नहीं देखा पर रोहिंग्या मुसलमानो के कैंप में ये तब से पसर कर बैठे है । उन्होंने बड़े ही जिज्ञासु भाव से अपनी इस अनूठी योजना के बारे में बताते हुए आगे कहा – “मतलब कुछ तो बात होगी म्यांमार से आने वालों की, वर्ना देश भला इतना व्यथित तो कभी हमारे लिए नहीं हुआ था। इसलिए हम लोगों ने भी निर्णय लिया है की म्यांमार से फिर भारत वापस आये और शायद हमारे मानवाधिकारों की भी कोई सुध ले ले ”

वही कुछ धर्मनिरपेक्षता विशेषज्ञों का कहना है की केवल म्यांमार रिटर्न का टैग लगा लेना पर्याप्त नहीं होगा, जब तक मज़हब अपडेट नहीं करेंगे तब तक कोई उनकी खैर नहीं पूछने वाला । किसी वर्ग विशेष का नाम लिए बिना कहा की ” भई उनके बारे में हर कोई सुनता है, आखिर रबीस कुमार ऐसे ही नहीं मीडिया को गोदी मीडिया कह देते है। एक गोदी मीडिया तो रोहिंग्या के कैंप में जाके तब से उन्ही की गोदी में बैठा हुआ है और यहाँ कश्मीरी पंडितो को बोल दिया जाता है की “छोड़ो कल की बाते..कल की बात पुरानी, नए दौर में लिखेंगे हम एक और पलायन की कहानी”

इस खबर को सुनते ही अपने उत्साह को छुपाने का असफल प्रयास करते हुए उमर अब्दुल्लाह ने कहा की वो इस कदम का स्वागत करते है और म्यांमार सरकार से अपील करते है की कश्मीरी पंडितो की अच्छे से मेहमान नवाज़ी करे और उन्हें वापस भारत न आने दिया जाए ।

वही रबीस कुमार ने इसे एक पब्लिसिटी स्टंट बताते हुए अपने प्रसिद्ध अंदाज़ में कहा “म्यांमार से रोहिंग्या रिफ्यूजी बन कर तो आ जाओगे पर उनके जैसा मज़हब भी ला पाओगे क्या? आइये यही पर समाप्त करते है, कल फिर मिलेंगे इसी समय, प्राइम टाइम !”



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