Monday, 23rd October, 2017

चलते चलते

जेएनयू ने दिया बिहार बोर्ड के 41 वर्षीय 12वीं टॉपर गणेश को पीएचडी में एडमिशन का ऑफ़र

06, Jun 2017 By Shaitaan Khopdi ™

पटना. गणेश कुमार, जिन्होंने 41 वर्ष की उम्र में बिहार बोर्ड के बारहवीं के एग्ज़ाम में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है, आज न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे हिंदुस्तान में एक मिसाल बन चुके हैं। जहाँ एक तरफ लोग हैरान हैं कि 12वीं पास करते-करते कोई 41 साल का कैसे हो गया, वहीँ ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो मानते हैं कि गणेश कुमार मेहनत और लगन का जीता-जागता नमूना हैं। गणेश जी की इसी लगन से प्रभावित होकर JNU ने उनको अपने पीएचडी कोर्स में सीधा दाखिला देने का प्रस्ताव दिया है। जेएनयू हमेशा से देश भर के प्रौढ़ शिक्षा केंद्रों के लिए आदर्श स्थापित करता रहा है। यह मौजूदा क़दम भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

Ganesh Kumar
जेएनयू के प्रस्ताव पर ग़ौर फ़रमाते गणेश बाबू

जब हमने JNU के वाइस-चांसलर से पूछा कि “अभी तो गणेश बाबू ने सिर्फ 12वीं पास की है। उन्हें ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कर लेने दो, फिर पीएचडी में दाखिला दे देना” तो वो तपाक से बोले, “देखो यार, जिसने 41 साल में बारहवीं पास की है, उसको BA, MA करने में भी 15-20 साल तो लग ही जायेंगे। फिर तब तक उसका मूड बदल गया या फिर कहीं और से कोई और ऑफ़र आ गया तब क्या होगा? इतने मेधावी और प्रतिभाशाली छात्र को हम अपने ‘हॉल ऑफ़ फेम’ में शामिल करने का मौका हाथ से नहीं जाने दे सकते।”

इस बारे में जब हमारे संवाददाता ने JNU के छात्रों से उनकी राय जाननी चाही तो वे काफी उत्साहित दिखाई दिए। पीएचडी के एक 35 वर्षीय छात्र ‘उमर वालिद’ जो कि वाकई वालिद की उम्र के दिखते हैं, ने बताया – “40 साल तक पीएचडी में अटके रहना बड़ी मेहनत का काम है लेकिन गणेश ने तो 12वीं में ही 41 साल गुज़ार दिए। यह वाकई काबिले-तारीफ उपलब्धि है। जिस रफ़्तार से ये जा रहे हैं, पीएचडी पूरी होने से पहले ये रिटायर होकर पेंशन लेने लग जायेंगे।” दबी ज़ुबान में वालिद साहब ये भी बोल गए कि JNU कैम्पस में गणेश की काबिलियत के चर्चे इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि कन्हइया भैय्या भी अपनी पोजिशन को लेकर असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।”

उधर, आनन-फानन में कन्हइया भैय्या ने आज़ादी गैंग को कैम्पस में थोड़ी नारेबाजी करके माहौल बनाने का आदेश दे डाला और मीडिया के मित्रों को फोन करके एडवांस में इत्तला भी कर दी, जिससे मीडिया कवरेज में कोई कमी न रह जाये। लेकिन दुर्भाग्य से NDTV सीबीआई के छापे की वजह से अपनी खुद की उलझनों में व्यस्त था और बाकी मीडिया वाले ICC चैम्पियंस ट्रॉफी में खेले गए भारत-पाक मैच का मुजरिम ढूंढने में लगे थे। ले दे के सिर्फ Zee TV बचा था, जो कि हाइपर नेशनलिज़्म से सराबोर होकर भारत-पाक मैच का विरोध कर रहा था। फ़िलहाल स्थिति की गंभीरता को भाँपते हुए कन्हइया ने नारेबाजी का प्लान कुछ दिनों के लिए टाल दिया है।



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