Thursday, 30th March, 2017
चलते चलते

जाटों को दिल्ली की ओर आता देख मोदी जी परेशान, कोलकाता को राजधानी बनाने की तैयारी शुरू

04, Mar 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. हरियाणा के जाट समुदाय ने आरक्षण की मांग को लेकर फिर आन्दोलन शुरू कर दिया है। उन्होंने धमकी दी है कि अगर 20 तारीख तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे दिल्ली आकर संसद का घेराव करेंगे। इस धमकी से सुरेश प्रभु के आलावा केंद्र सरकार के भी होश उड़ गए हैं। आनन-फानन में कल रात को ही प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक सीक्रेट मीटिंग बुलाई गई। इस मीटिंग में निर्णय लिया गया कि जाटों से टकराने से अच्छा है कि देश की राजधानी को ही बदल दिया जाए। इस सीक्रेट मीटिंग की सारी बातें हमारे ख़ुफ़िया कैमरे में कैद हो गईं। वहां क्या हुआ आप भी पढ़िए-

कोलकाता को राजधानी बनाने का विचार करते मोदी जी
कोलकाता को राजधानी बनाने पर विचार करते मोदी जी

(मोदी जी सबसे बीच वाली सीट पर चुपचाप बैठे हुए हैं। वहीँ, पता नहीं क्यों वेंकैया नायडू जी काफी गुस्से में नज़र आ रहे हैं।)

सुरेश प्रभु (रोते हुए): मोदी जी! उन्होंने फिर से आंदोलन शुरू कर दिया है। अब पटरियों को कौन बचाएगा?”

(इतने में वेंकैया नायडू अपनी कुर्सी से उठते हैं और सुरेश प्रभु को चुप कराने लगते हैं।)

राजनाथ: मुझे लगता है कि हमें दिल्ली की सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात कर देना चाहिए!

वेंकैया: फालतू बात मत करिए राजनाथ जी! पुलिस बल तो अभी भी तैनात है, इससे कुछ नहीं होगा। कुछ नया उपाय बताइए!”

गडकरी (समोसा दबाते हुए): ..तो फिर हम हरियाणा बॉर्डर पर एक दीवार बना देंगे!

वेंकैया: बिलकुल दो कौड़ी का आईडिया है।  अरे..वो लोग ट्रैक्टर चढ़ा देंगे तुम्हारी नई-नवेली दीवार पर। बड़ा आया दीवार बनाने वाला! ट्रम्प का फोटो कॉपी। जा तू अपनी सड़क बना!”

(दोनों लड़ने लगते हैं। राजनाथ उठकर दोनों को शांत कराते हैं।)

राजनाथ: अरे तुम लोग आपस में लड़ना बंद करो! समस्या गंभीर है! (फिर वे मनोहर पर्रिकर के कंधे पर हाथ रखकर बोले) क्यों? पर्रिकर जी! आप का क्या सुझाव है?”

पर्रिकर: Look! I support freedom of expression, but within the legal framework.

वेंकैया (भन्नाते हुए): पर्रिकर जी! आप फिर से सो गए थे क्या? हम यहाँ पर JNU के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। जाटों के बारे में बात कर रहे हैं। मीटिंग पे ध्यान दीजिये!”

(इस बीच सुरेश प्रभु फिर से दहाड़ें मारकर रोने लगते हैं जिसे नायडू जी चुप कराते हैं।)

सुषमा: मुझे लगता है कि हमें अमेरिका से मदद लेनी चाहिए?

वेंकैया: देखिए मैडम! आप तो चुप ही रहिए। जाइए इराक-सीरिया से किसी का फोन आया है!

जेटली: इनके पास पैसा कहाँ से आता है? मैं कल ही इन लोगों को नोटिस भेजता हूँ!

वेंकैया: जेटली जी! आप तो कुछ बोलिए ही मत। दो साल से देख रहे हैं आपको! नोटिस भेजने के अलावा कुछ किया है आपने। ललित मोडी, माल्या…

उमा भारती (मजाकिया लहजे में): …तो फिर हम उन पर यमुना के जल से बौछार करेंगे! यमुना का पानी भी बहुत गंदा है। हाँ!

वेंकैया: अरी ओ! गंगा-जमुनी तहजीब! तनिक शांत रहो और कोई ठोस आईडिया दो!

(आखिर में मोदी जी अपनी चुप्पी तोड़ते हैं।)

मोदी: क्यों ना हम चुपके से देश की राजधानी दिल्ली से बदलकर कलकत्ता कर लें। वे जब 20 तारीख को दिल्ली आएँगे तो यह देखकर निराश हो जाएँगे और वापस चले जाएंगे!

(इतना सुनते ही सभी अपनी कुर्सियों से उछल पड़ते हैं। सब मोदी जी की तारीफ़ करते हैं। मीटिंग समाप्त होती है और सब एक-दूसरे को बधाई देते हुए मीटिंग-हॉल से निकलने लगते हैं)



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