Tuesday, 24th April, 2018

चलते चलते

पद्मावती हंगामा: टारगेट पूरा करने के लिए सिनेमाघरों के बाहर पॉलिसी बेच रहे हैं बीमा एजेंट

29, Jan 2018 By Guest Patrakar

गुरुग्राम. जहाँ एक तरफ़ ‘करनी सेना बनाम पद्मावत’ विवाद ने पुलिस और प्रशासन की नाक में दम कर रखा है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इस विवाद से जमकर फ़ायदा उठा रहे हैं। और ये लोग हैं हमारे भविष्य की सुरक्षा करने वाले बीमा एजेंट! तोड़फोड़ और मारपीट के बीच ये भाई लोग अपनी बीमा पॉलिसी के टारगेट पूरा करते नज़र आ रहे हैं।

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सिनेमा हॉल के बाहर पॉलिसी बेचते गुप्ता जी

जी हाँ! महीना ख़त्म होने को है और इनके टारगेट पूरे नहीं हो रहे हैं। ऐसे में ये बीमा एजेंट टारगेट पूरा करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर पद्मावत के थिएटर्स के बाहर पॉलिसी बेच रहे हैं। ऐसे ही एक जाँबाज़ एजेंट राजीव गुप्ता से हमने बात की जो कि LIC गुड़गाँव में कई सालों से पॉलिसियाँ बेच रहे हैं। राजीव ने बताया, “महीने का लास्ट था और टारगेट पूरे करने के लिए पूरी 70 पॉलिसी बाक़ी थीं। तो हमने तरकीब लगाई कि लोगों के घर-घर जाकर पॉलिसी बेचने से अच्छा है कि हम उन सिनेमा हॉल्स के बाहर अपनी पॉलिसी बेचें, जहाँ पद्मावत चल रही है। जान का ख़तरा जहाँ होता है अक्सर लोग वहाँ जल्दी से पॉलिसी ख़रीद लेते हैं। रिस्क तो था लेकिन टारगेट भी पूरा करना था। इसलिए हम दंगे-फ़साद के बीच हेलमेट पहन के घुस गए और लग गये पॉलिसी बेचने में! हालात इतने बुरे और डरावने थे कि मेरी और अन्य टीमों का ना केवल टारगेट पूरा हुआ बल्कि हमने इतनी पॉलिसी बेच दीं कि हमें बोनस भी मिल गया। मैं तो चाहता हूँ कि भंसाली हर महीने ऐसी विवादित फ़िल्म बनाए और लोग जम के हंगामा करें और हम हर महीने टारगेट पूरा करें!”

हमने LIC के MD प्रकाश दुबे से भी इस विषय पर बात की और उनकी भी राय ली। प्रकाश जी बोले, “ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है जब किसी फ़िल्म के कारण हमारी पॉलिसी बिक्री में उछाल आता है। यह दुखद तो है लेकिन हमारा धंधा भी इसी से चलता है। आख़िरी बार ऐसा तब हुआ था जब शाहरुख़ ख़ान की हैप्पी न्यू ईयर रिलीज़ हुई थी। लोगों को अपनी जान का इतना ख़तरा लग रहा था कि वे फ़िल्म के टिकट के साथ-साथ हमारी पॉलिसी भी ख़रीद रहे थे। इतना ही नहीं, एक फ़िल्म डिस्ट्रिब्यूटर ने तो LIC के साथ ही असोसिएशन कर लिया था।”

लेकिन ऐसा कभी-कभी ही देखने को मिलता है। ऐसे में बीमा एजेंट ऐसी जगहों पर जाते है जहाँ निश्चित पॉलिसी बिक ही जाये। जैसे सलमान के घर के आस-पास का इलाक़ा, जहाँ कभी भी आपको पॉलिसी कैश इन करने की नौबत आ सकती है।

वैसे, यह विडंबना ही है कि बीमा एजेंटों के घरों का चूल्हा लोगों के जान के जोख़िम से ही चलता है। लेकिन जैसे रईस बोलता है कि कोई भी धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता, इसलिए बीमा एजेंट भी इस बिज़नेस को बड़ी शिद्दत से करते हैं।



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