Thursday, 26th April, 2018

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भारतीय वैज्ञानिकों की नयी खोज: 'AIDS' से अधिक जानलेवा है 'AIBS'

13, Feb 2018 By Saquib Salim

एजेंसी. विज्ञान के क्षेत्र में अगर भारत के योगदान की बात की जाये तो ये अपने आप में एक विजय गाथा है। इस पावन भूमि पर जन्मे सपूतों ने विश्व को गणित, शल्य-चिकित्सा, आयुर्वेद, खगोल आदि में बहुत कुछ दिया है। परन्तु भारतीय वैज्ञानिकों ने कल जो अपनी नयी खोज दुनिया के सामने रखी है, उसे विज्ञान के क्षेत्र में भारत का अब तक का सब से बड़ा योगदान माना जा रहा है।

scientist in lab
लैब में AIDS और AIBS पर परीक्षण करते वैज्ञानिक

भारत की मशहूर चिकित्सक सुश्री डॉक्टर मारिया ने अपनी इस नयी खोज के बारे में पत्रकारों को बताया। उन्होंने बताया कि “मैंने AIBS (All India Bhakti Syndrome) नाम की एक नयी बीमारी को खोज निकाला है। ये बीमारी AIDS से कहीं अधिक घातक और तेज़ी से फैलने वाली है।”

उन्होंने आगे बताया, “इस बीमारी का कारण एक WFY (WhatsApp-Facebook-Youtube) वायरस होता है। वैसे तो, भक्ति मनुष्य में हमेशा से रहती आयी है, पर पहले ये भक्ति इस वायरस से नहीं फैलती थी और जानलेवा साबित नहीं होती थी। लोग भगवान की भक्ति मंदिर, जंगल या मस्जिद में बैठकर कर लेते थे और चुपचाप अपने काम से काम रखते थे। परन्तु तब यह बीमारी एक साधारण से वायरस RIP (Religion Is Personal) के द्वारा फैलती थी। जब टेक्नोलॉजी का प्रचार-प्रसार हुआ, तब RIP वायरस अमेरिका पहुंचा जहाँ उसका समावेश IT (Information Technology) क्रांति से हो गया। इसी के साथ एक नए वायरस WFY ने जन्म लिया।”

उन्होंने ये जानकारी भी दी कि इस वायरस के इंसान में आ जाने भर से ज़रूरी नहीं कि उसको AIBS हो ही जाये! कई बार शरीर वायरस को बीमारी नहीं बनने देता। शरीर की ये प्रतिरोधक क्षमता एक एंटी-बॉडी से आती है जिसको LTR (Logical Thinking Reasoning) कहा जाता है। पिछले कुछ समय में मनुष्य के शरीर में इस एंटीबॉडी की भारी कमी देखी गयी है, जिस कारण AIBS और अधिक ख़तरनाक हो जाता है.

इस बीमारी का एक ख़ास प्रभाव ये है कि इस से मनुष्य किसी का भी भक्त बन सकता है। इस बीमारी की वजह से देश में मोदी भक्त, राहुल भक्त, वामपंथ भक्त, अंधभक्त, और भक्तों के भक्त बहुतायात में पाये जा रहे हैं।

AIDS की तरह ये बीमारी साथ खाने या मिलने-जुलने से नहीं फैलती बल्कि आपस में मिलने जुलने से तो इस बीमारी का जानलेवा असर कम हो जाता है। ये बीमारी whatsapp, facebook, youtube आदि से फैलती है। जहाँ AIDS से केवल मरीज़ की जान को खतरा होता है, वहीं AIBS से समाज के हर प्राणी की जान को खतरा होता है। देखा गया है कि इराक़, सीरिया में इस्लामिक स्टेट ने youtube पर वीडियो डालने के लिए कई लोगों के सर काट डाले थे। भारत में कुछ लोग whatsapp या youtube पर वीडियो डालने के लिए लोगों को मार रहे हैं। ऐसा नहीं कि इसे फैलाने वाला बच जाता है, अंत में वो ख़ुद भी सज़ा पाता है।

इस बीमारी की एक और ख़ास बात ये भी देखी गयी है कि हर भक्त अपनी भक्ति को ‘भक्ति’ नहीं मानता पर दूसरे की भक्ति को भक्ति मानने में उसे ज़रा भी देर नहीं लगती। सुश्री डॉक्टर मरिया ने बताया कि “फ़िलहाल इसके लिए दवा की खोज जारी है परन्तु इसकी रोकथाम के लिए अच्छी किताबें पढ़ना और नेता और भगवान में फ़र्क समझना ज़रूरी है।”

दूसरी ओर ये ख़बर आते ही whatsapp और facebook ग्रुप चलाने वालों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है। उनका कहना है कि AIDS सेक्स संबंधों द्वारा फैलता है और AIBS चूंकि उससे भी ख़तरनाक बीमारी है तो इसके कारण यानी सोशल मीडिया को वैज्ञानिकों ने भी अधिक आनंदमयी मान लिया है।



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