Wednesday, 25th April, 2018

चलते चलते

मन में अपराध का ख़याल आते ही यूपी पुलिस को सरेंडर कर आया युवक

21, Feb 2018 By Guest Patrakar

लखनऊ. “थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब प्यार से लगता है”, ‘दबंग’ फ़िल्म का यह मशहूर डायलॉग तो आपको याद होगा ही। लेकिन अगर दबंग आज के उत्तर प्रदेश पर बनी होती तो ये डायलॉग कुछ यूँ होता- “जेल से डर नहीं लगता साहब बेल से लगता है!” जी हाँ! जिस यूपी पुलिस का पहले लोग मज़ाक़ बनाते नहीं थकते थे, आज उसी यूपी पुलिस ने योगी आदित्यनाथ के अंडर ऐसा ख़ौफ़ पैदा कर दिया है कि लोग क्राइम करना तो छोड़िए, क्राइम के बारे में सोचने से भी डर रहे हैं। कुछ ऐसा ही हुआ ज़िला कोसी के गिरवर यादव के साथ, जो अपराध करने मात्र का ख़्याल आते ही यूपी पुलिस के पास सरेंडर करने पहुँच गए।

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यूपी पुलिस के सामने सरेंडर करता एक अपराधी

हमने गिरवर से बात की और उनसे सरेंडर और इस डर की वजह जानी। गिरवर ने कहा, “मैं एक छोटी सी परचून की दुकान चलाता हूँ। बीते दिनों धंदा मंदा था तो मैंने सोचा कि कोई बैंक लूट लूँ। मैं अपराध को अंजाम देने की प्लानिंग कर ही रहा था कि मैंने अख़बार में यूपी पुलिस के एंकाउंटर की लिस्ट पढ़ ली। बस मैंने तभी चोरी का इरादा छोड़ दिया और पुलिस में जमा होने चला गया। मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था मेरे दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।”

हमने कोसी थाने के एसआई पवन कुमार से बात की, जिन्होंने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, “गिरवर हमारे पास आए ज़रूर थे लेकिन हम किसी को क्राइम के बारे में सोचने भर के लिए गिरफ़्तार नहीं कर सकते। इसलिए हमने उन्हें गिरफ़्तार ना करते हए सलाह दी कि ऐसे विचार मन में भी ना आने दें और उन्हें वापस लौटा दिया। योगी राज में ऐसे कई कारनामे रोज़ देखने को मिल रहे हैं। जो गुंडे हमें पहले धक्का या रिश्वत देने के लिए हाथ उठाते थे, वही गुंडे अब हमें हाथ जोड़ने के लिए हाथ उठाते है। कुछ क़ैदी तो सज़ा ख़त्म होने के बावजूद जेल से बाहर इसलिए नहीं जाना चाहते क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके बाहर आते ही हम उन्हें मार देंगे। यह डर हर मुजरिम के दिल में बन जाए तो हमारा यूपी भी किसी न्यूयॉर्क से कम नहीं लगेगा।”

लेकिन यूपी पुलिस के लिए सब कुछ हरा नहीं चल रहा है। ह्यूमन राइट्स कमिशन ने यूपी पुलिस और योगी आदित्यनाथ से बढ़ते एनकाउंटरों पर जवाब माँगा है। जिसका जवाब देते हुए योगी जी ने कहा “मैं अभी UP साफ़ करने में व्यस्त हूँ। ह्यूमन राइट्स वाले चाहें तो मुझे पाँच साल के नोटिस एक साथ दे दें। मैं पाँच साल बाद जवाब दे दूँगा।”



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