Thursday, 21st September, 2017

चलते चलते

गाकर बारिश लाने वाले लड़के से अपनी बेटी को बचाने के लिए बैंक्वेट हॉल में क्यों नहीं करते शादी?

01, Feb 2017 By Pagla Ghoda

मुम्बई. बरखा के पिता धड़कन लाल जी ने अपनी बेटी के आशिक़ रणबीर तानसेनिया के सामने आखिरकार सरेंडर कर ही दिया। बार-बार उनकी बेटी की शादी पर पानी फिर जाने से उनका रुपये-पैसे का नुकसान तो होता ही था, साथ ही साथ उनकी बेटी की शादी में आये बाराती भी हर बार उनके दिए हुए रेनकोट लेकर भाग जाया करते थे। इस वजह से उन्हें काफी गुस्सा आता था। शादी के खाने के बर्तनों में भी पानी भर जाता था, तो कैटरिंग और टेंट वाले अलग बिल बना के बैठे रहते थे। जात-बिरादरी में और फेसबुक पे बदनामी हो रही थी सो अलग!

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धड़कनलाल जी की बेटी की शादी रोकता तानसेनिया

लेकिन धड़कन लाल जी के पड़ोसी छप्पन लाल जी उनके इस सरेंडर से काफी आहत हैं। उन्होंने फेकिंग न्यूज़ को बताया, “भाई हमारे धड़कन लाल जी या तो अकल से काफी पैदल हैं या फिर ज्योतिष के अन्धविश्वासी! अजी अपने ही घर के आँगन में शादी रखवाते हो, टेंट भी नहीं लगवाते हो। और जब तानसेन का वंशज गीत गाकर, बारिश लाकर आपकी बेटी की शादी पे कई लीटर पानी फेर देता है तो कहते हो कि ‘जा बरखा जा, जी ले अपनी ज़िन्दगी!’ आई मीन, बैंक्वेट हाल भी कोई चीज़ होती है! वहां छत नाम की भी कोई चीज़ होती है कि नहीं?” -अपने दोनों हाथ फैलाकर छप्पन लाल जी ने बड़े आश्चर्य से पूछा।

मलाईवाली चाय का एक सिप लेते हुए छप्पनलाल जी आगे बोले, “अजी हमसे बोला होता एक बार, एक क्या दस बैंक्वेट हॉल बुक करवा देते, एक से बढ़के एक। हमारे दामाद जी के जिगरी दोस्त के सौतेले फूफा का तो बिज़नस ही यही है। और हमारी बिटिया की सहेली की सबसे छोटी बुआ के दूसरे पति भी यही काम करते हैं। तो कनेक्शन तो काफी हैं हमारे, लेकिन हमें कोई बोले तो सही, कोई बोलता ही नहीं!”

बाद में थोड़ा दुखी होते हुए छप्पन लाल जी बोले, “हमारी बिटिया के पीछे भी लग गया था ऐसा ही एक गवैया, राठौर कुछ नाम था उसका। तो हमने गाँव में अपने छोटे भाई कीकला को खबर कर दी थी और उसने निपटा दिया था उस गवैये को। नहीं जी नहीं, हमारा भाई कीकला कोई गुंडा नहीं है, वो तो बेचारा पोस्टमैन है गांव का। उसने उस गवैये को चिठ्ठी लिखवा के भेज दी कि “बेटा तुम्हारी परनानी तुम्हारे लिए करोड़ों की जायदाद छोड़ गयी हैं, फौरन गाँव आके हिसाब कर लियो।” जितने में वो लड़का भागा-भागा गाँव गया, उतने में तो हमने अपनी बिटिया का ब्याह बिना बारिश के करवा दिया। यहाँ तक कि मेहँदी, घूंघट उठाई, लेडीज संगीत इत्यादि कुल मिलाकर आठ फंक्शन भी कर डाले। इसे कहते हैं चतुराई! शादी एक बेटी की क्या, दस बेटियों की एक साथ करवा दें, वो भी एक से बढ़ के एक, लेकिन हमें कोई बोले तो सही, कोई बोलता ही नहीं!”

छप्पन लाल जी की अवार्ड विनिंग बातों में कितना दम है ये तो स्वयं छप्पन लाल जी ही जानते हैं परंतु देश के जाने-माने अर्थशास्त्रियों के अनुसार यदि ऐसे कुछ और गवैये लड़के मार्किट में आ गए तो बैंक्वेट हाल में बेटियों की शादी करने वाले पिताओं की संख्या में भयंकर इज़ाफ़ा होने की उम्मीद है।



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