Friday, 23rd June, 2017
चलते चलते

लड़की के कई हज़ार के नोट बदलवाने के बाद भी लड़का नहीं निकल पाया उसके फ्रेंडज़ोन से

15, Nov 2016 By Pagla Ghoda

कोलकाता. ‘सन्देश कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड फाइन आर्ट्स’ का छात्र शुभेंदु भट्टाचार्जी आजकल गहरे सदमे में है। कारण ये है कि कॉलेज में नयी-नयी आई छात्रा परमिंदर कौर ने उसकी लाख कोशिशों के बाद भी उसे अपने फ्रेंडज़ोन से निकालने से इनकार कर दिया है। शुभेंदु ने परमिंदर के हज़ार-हज़ार के पंद्रह नोट भी इधर-उधर से बदलवा के उसे सौ-सौ के नोट दिलवाये ताकि उसे इम्प्रेस कर सके लेकिन तब भी उसे यही सुनने को मिला- “ओह, यू आर माई बेस्ट फ्रेंड शुभू!”

Bank Queue
दसवीं बार नोट बदलवाने के लिये लाइन में खड़ा शुभेंदु

हमने शुभेंदु से बात की तो उसकी आँखें लाल थीं, जैसे वो पूरी रात रोया हो। उसने बताया, “हम पोरमिन्दर को बोला, अमी तुमको बोत पोशोन्द कोरता है। अमी तुमाके बालोबाशी! वो बोलता है के बालूशाही? उसको भी बालूशाही बहुत पसंद है। अमी बोला नोई रे बाबा बालूशाही नोई, बालोबाशी! What to do? अभी हम उसका फिफ्टीन नोट्स चेंज करवाया। थाउजेंड से हंड्रेड का नोट्स में। पागल हो गया नोट चेंज कराने का चक्कर में! लेकिन अभी भी हम उसका फ्रेंडज़ोन में ही है? Still?” शुभेंदु फफक-फफक कर रो पड़ा।

दो प्लेट फिश फ्राई खाने के बाद उसे थोड़ा सुकून मिला तो उसने आगे कहा, “लास्ट वीक तक हम शामोलीका भाट का फ्रेंडज़ोन में था। शामोलीका तो हमारा कॉलेज का टॉप ब्यूटीफुल गर्ल है। उसको भी पीछा हम छोड़ दिया फॉर पोरमिन्दर! पर दोनों साइड अभी अपन फ्लॉप हो गया। अभी हम सारा हज़ार-हज़ार का नोट में आग लगा के उसी आग में कूद के जान दे देगा, तभी इस दुनिया को पता चलेगा हमारे सच्चा लोव के बारे में!”

तभी शुभेंदु के पीछे उसकी माताजी श्रीमती शारदा भट्टाचार्जी आ खड़ी हुईं और उन्होंने उसके आग में कूदने के प्लान को सुन लिया। उन्होंने उसकी चप्पलों से काफी धुलाई की और कहा, “हम बोला के बैंक जाके सौ-सौ का नोट ले आओ तो बोलता है कि हमको स्टडी करना है, टाइम भेस्ट होगा। और लड़की लोग का नोट जोल्दी-जोल्दी चेंज करा देता है।” शारदा जी ने शुभेंदु को एक कान से पकड़ा और खींचकर उसे घर जाते हुए बोलीं, “लोड़की का दो दिन का लोव सच्चा लोव है और हम जो तुमको प्यार करता है वो सच्चा लोव नहीं है? चोलो, घर चोल के सारा सोच्चा लोव निकालेगा तुम्हारा!”



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