Wednesday, 22nd November, 2017

चलते चलते

'बुलेट ट्रेन में दुकान-खोली होगी या नहीं?', पता लगाने मोदी जी के पास पहुंचे गुजराती

14, Sep 2017 By Ritesh Sinha

अहमदाबाद. गुजरात के 50-60 व्यापारी, कल मोदी जी से अचानक मिलने पहुँच गए। दरअसल, ये लोग उनसे मिलकर यह जानना चाहते थे कि बुलेट ट्रेन में ‘दुकान-खोली’ होगी या नहीं? साथ ही ये अपने साथ बयाने की रकम भी लेकर पहुंचे थे, ताकि तुरंत खोली बुक कर सकें। जब सभी व्यापारी मोदी जी से चर्चा कर रहे थे, तभी वहां जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भी पहुँच गए। उन्हें देखते ही विनोद भाई सांखला जी चिल्ला उठे- “अरे! मोटा भाई से क्या पूछना? असली पार्टी तो उधर है! चलो, उनसे नक्खी करते हैं!” -कहते हुए सभी वहां से उठ गए और शिंजो आबे के पास जाकर बैठ गए।

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दुकान की जगह निकालते मोदी और आबे जी

आबे साब को लगा कि ये लोग शायद बुलेट ट्रेन के बारे में जानने आये हैं, तो वे इस ट्रेन की स्पीड और फीचर्स के बारे में लंबी-लंबी हांकने लगे। तभी संपत भाई ने उन्हें टोकते हुए कहा- “ऐ मोटा भाई! अगर आपका हो गया हो तो कुछ धंधे-पानी की बात शुरू करें! आप जो बता रहे हो ना! वो सब हमें पता है! वो क्या है ना, हम लोग यहाँ पर ये पूछने आए हैं कि आप बुलेट ट्रेन में खोली निकाल रहे हो कि नहीं? अगर निकाल रहे हो, तो ये लो पांच सौ रुपये,बयाना समझके रख लो!” -कहते हुए उन्होंने पैसा आबे जी की गोदी में रख दिया।

उनकी ये हरकत देखकर आबे जी सकपका गए, उन्होंने धीरे से पूछा- ” ये ‘खोली’ क्या होता है? कोई नया टेक्नोलॉजी है क्या?” उनका यह सवाल सुनकर सोहन भाई भंसाली जी आगे आए और उन्हें समझाने लगे (अंग्रेजी में)- “देखो मोटा भाई! ‘दुकान खोली’, यानि कि धंधे के लिए जगह! बुलेट ट्रेन में अमीर लोग बैठेंगे ना, तो उधर हम लोग कुछ भी चीज़ का दुकान डाल सकते हैं! बिक्री अच्छा होगा नई! तो यही सोचकर हम आपको बयाना देने आए हैं! नकद हाँ! कितना मंगते हो आप बोलो!”

“ये जो मदन भाई हैं ना! इन्होने अभी-अभी नया घर बनाया है, चार दुकान काट दी इन्होंने अपने नये घर में! हाँ! तीसरी मंजिल पर किचन रख दिया! वैसे ही आप भी बुलेट ट्रेन में एक और डिब्बा जोड़कर वहां दुकान खोली निकालो ना! ताकि हम लोग ट्रेन के भीतर दुकान डाल सकें!” -सोहन भाई ने विस्तार से समझाया।

इस बार आबे जी समझ गए, और थोड़ी देर तक सोचकर बोले- “ओह्ह! अब समझ में आया! लेकिन ऐसा कोई प्लान नहीं है!” अभी उन्होंने ऐसा कहा ही था कि सारे लोग उठकर वहां से जाने लगे, “चलो भाई! दूसरी जगह ट्राई करते हैं!”- जाते-जाते वे फुसफुसाने लगे। इन सबको वापस आता हुआ देखकर मोदीजी ने रोक लिया और इशारे से पूछा, “क्या हुआ? खोली मिला?”

इतना सुनते ही सभी लोग मोदीजी को घूरकर देखने लगे। “एक खोली नहीं दिलवा सकते! आना अब, आप वोट मांगने!” -विनोद भाई ने दांत रगड़ते हुए जवाब दिया और पैर पटकते हुए चले गये।



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