Sunday, 20th August, 2017

चलते चलते

ज़ाकिर के उपदेशों की जांच में फ़ारसी और ना’वी भाषा के जानकारों की मदद लेंगे -राजनाथ

11, Jul 2016 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. विवादास्पद रट्टू धार्मिक उपदेशक ज़ाकिर नाईक के उपदेशों को समझने के लिये केंद्र सरकार अब फ़ारसी के जानकारों की मदद लेगी। इसके अलावा, इस हरक्यूलियन टास्क में हॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक जेम्स कैमरन की मदद भी ली जायेगी।

“रट्टा लगाने में भी दिमाग़ लगता है, समझे कुछ?”

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस फ़ैसले की जानकारी देते हुए बताया कि “हम 20 दिनों से ज़ाकिर की स्पीचों की कड़ी निंदा जांच कर रहे हैं लेकिन कुछ पल्ले ही नहीं पड़ा रहा। इसलिये अब मजबूर होकर हमने उसके वीडियो फ़ारसी के जानकारों को दिखाने का फ़ैसला किया है।”

“लेकिन सर, हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या!”, इस पर राजनाथ ने कहा- “इसी बात का तो रोना है भाईसाब! पढ़े-लिखे लोगों की ही तो शॉर्टेज है हमारे पास। अगर पढ़े-लिखे होते तो हम ईरानी और चौहानों को ही मंत्री-अफ़सर बनाते क्या?”

“और ज़ाकिर की स्पीचों में जो गहरा अर्थ छुपा होता है, उसे समझना आम इंसानों के बस की बात नहीं है।” -कहकर उन्होंने हाथ खड़े कर दिये।

“लेकिन उसकी सारी स्पीचें तो हिंदी और इंग्लिश में हैं”, यह सुनकर वो बोले- “ये कोई ऐसी-वैसी हिंदी नहीं है भाईसाब! मुलायम की टक्कर की हिंदी है। तुम समझ लेते हो क्या उसे। बोलो!” कहकर उन्होंने हमारे संवाददाता की बोलती बंद कर दी।

गृहमंत्री ने अंत में कहा कि “प्रधानमंत्री जी अपने 51वें विदेशी दौरे से लौटने वाले हैं, ये वीडियो हम उन्हें भी दिखायेंगे। हो सकता है वो कुछ समझ लें क्योंकि उनकी समझ से बाहर कुछ नहीं है।”

इस बीच,  ज़ाकिर को बचपन में मैथ्स पढ़ाने वाले टीचर ने ख़ुलासा किया है कि “जक्कू (बचपन का नाम) को 7 का पहाड़ा याद नहीं हो पाता था, जिसकी वजह से उसे क्लास में रोज़ मुर्गा बनना पड़ता था। सारे बच्चे उसे कुकड़ूं कूं कहकर चिढ़ाते थे। जिससे बचने के लिये उसने चैप्टर रटने शुरु कर दिये और आज तक रटे जा रहा है।”



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