Sunday, 24th September, 2017

चलते चलते

सरकारी ख़ज़ाने में नोट ख़त्म, एक महीने तक शरद पवार के रुपयों से काम चलायेगी सरकार

17, Nov 2016 By बगुला भगत

मुंबई. नोटों की किल्लत से जूझ रहे देशवासियों के लिये एक बुरी ख़बर और एक अच्छी ख़बर है। बुरी ख़बर ये है कि सरकार का ख़ज़ाना खाली हो चुका है और उसके पास एटीएम और बैंकों को देने के लिये नोट नहीं बचे हैं। लेकिन अच्छी ख़बर ये है कि संकट की इस घड़ी में ‘घड़ी’ चुनाव चिन्ह वाले शरद पवार सरकार की मदद करने को तैयार हो गये हैं।

sharad pawar
“सिर्फ़ एक महीने के लिये अपने बंगले का ताला खोल रहा हूं मैं!”

आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल ने आज सुबह प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि हमारे ख़ज़ाने में सिर्फ़ एक दिन के नोट बचे हैं। यह सुनते ही मोदी जी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार को फ़ोन लगाया और सारी सिचुएशन समझाते हुए उनसे मदद की अपील की। शुरु में तो पवार साब ने आनाकानी की। उन्होंने कहा कि “मोदी जी, हमारे पास कहां इतने रुपये धरे हैं!” लेकिन जब मोदी जी ने उन्हें कुछ दस्तावेज़ दिखाये, जिन पर सीबीआई जैसा कुछ लिखा था, तो पवार साब मान गये।

फ़ेकिंग न्यूज़ को सूत्रों के हवाले से पता चला है कि पवार साब अपने सौ-सौ के नोटों वाले बंगले का ताला खोलने को राज़ी हो गये हैं। लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी है। ताला खोलने से पहले उन्होंने कहा कि “मैं सिर्फ़ 30 दिनों के लिये मदद कर रहा हूं। तीस दिन के अंदर अपने नोट छाप लेना। इसके बाद मैं अपने किसी और बंगले का ताला नहीं खोलूंगा। बता रहा हूं!”

पवार साब की इस दरियादिली को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गयी उनकी तारीफ़ से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन पवार साब इससे इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मेरी तारीफ़ तो मोदी जी ने पहले भी की है, इससे पहले तो मैंने कभी अपने किसी बंगले के दरवाज़े नहीं खोले।”

इस बीच, पुणे में आज उस समय अफ़रा-तफ़री मच गयी, जब एक बैंक के सामने कुछ ट्रक आकर रुके। ट्रक देखकर लोगों ने समझा कि शरद पवार अपने रुपये बदलवाने आये हैं। बाद में पता चला कि वे सारे ट्रक पुणे महानगरपालिका के थे, जो वहां कूड़ा उठाने आये थे।



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