Friday, 24th November, 2017

चलते चलते

'हिन्दी दिवस' के चक्कर में सरकारी कर्मचारी ने 'Bullet Train' की जगह लिख दिया 'गोली रेल'

15, Sep 2017 By नास्त्रेदमस

अहमदाबाद. हिंदी दिवस के चक्कर में भाई लोग कल बहुत ही जोश में थे। हिंदी बोलने वाली आम जनता, जिसे आम दिनों में साइड लाइन कर दिया जाता है, पूरे जोश के साथ अपनी शुद्ध हिन्दी का फुल शो ऑफ करती दिखी। लेकिन इस शो-बाज़ी के चक्कर में कई सरकारी कर्मचारी कभी-कभी बड़ी मुश्किल में फँस जाते हैं। बड़े अफसर लोग तो कह देते हैं कि आज सब काम हिन्दी में होगा पर इस चक्कर में निचले तबके के कर्मचारियों की वाट लग जाती है।

Modi- Bullet Train
देखिये सरकारी कर्मचारी की करतूत

ऐसी ही एक घटना हुई कल अहमदाबाद में। वैसे तो कल अहमदाबाद के लिये एक बहुत ही खास दिन था, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी जी ने जापान के प्रधानमंत्री शिज़ो अबे के साथ मिलकर वहाँ ‘बुलेट ट्रेन’ का शिलान्यास किया। ज़रा रुकिये! अपनी हिन्दी पे ज़्यादा ज़ोर मत डालिये, शिलान्यास का ‘शिला जी के नाश’ जैसा कोई अर्थ मत निकालिये, शिलान्यास का अर्थ है ‘Foundation’!

इस कार्यक्रम के जगह-जगह पोस्टर लगाए गए, मगर सरकारी कर्मचारियों के लिये ये दोगुनी परेशानी का सबब बन गया। एक तरफ तो उन्हें हिन्दी दिवस के पोस्टर लगाने थे और ऊपर से इस बुलेट ट्रेन के! तो एक सरकारी कर्मचारी ने अपना सरकारी दिमाग लगाया और सोचा दोनों काम एक साथ ही निपटा देते हैं। फिर क्या था! हिन्दी लिखने के चक्कर में उसने बड़े-बड़े साइज़ में लिख दिया- “हिंदी दिवस के इस शुभ अवसर पे ‘गोली रेल’ के शिलान्यास के इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे का स्वागत है!”

लोग भन्ना गये और थोड़े चौंधिया गये कि मोटा भाई ‘आ सु छे?’, कई जगह अफवाह फ़ैल गई कि कार्यक्रम में गोलियां चल गयीं। आनन-फानन में पुलिस भी दौड़कर मौक़े पर पहुँच गयी। पहुँचने पर पता चला कि गोली रेल अर्थात ‘Bullet Train’! जब कर्मचारी साब से पूछा गया कि आपने ऐसा क्यों लिखा?. तो उनका जवाब वही था, जो एक सरकारी कर्मचारी का होता है- “ऊपर से आर्डर था!”



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