Tuesday, 24th October, 2017

चलते चलते

चिपकू दोस्त से पिंड छुड़ाने के लिये युवक ने दिये पैसे उधार, दोस्त का फोन आना हुआ बंद

30, Sep 2016 By banneditqueen

इंदौर. कई बार कुछ ऐसे दोस्त गले पड़ जाते हैं जिनसे पीछा छुड़ाना मुश्किल होता है। आप उन्हें जितना अपनी ज़िंदगी से निकालने की कोशिश करते हैं उतना ही वह जोंक की तरह चिपके रहते हैं|ऐसा ही कुछ हुआ टी.आई.टी. मेकैनिकल फर्स्ट ईयर में पढने वाले समर के साथ। समर की एक दिन कैनटीन में मानस से दोस्ती हो गई। शुरु शुरू में दोनों दिन भर साथ रहते। अब मानस ने रोज़ समर को दिन रात कॉल करना शुरू कर दिया। समर उसके फोन कॉल अटेंड कर के तंग आ चुका था। अगर समर फोन ना उठाए तो मानस उसे मैसेज करता।

मानस से पैसे माँगता समर
मानस से पैसे माँगता समर

मानस रोज़ सुबह समर के हॉस्टल के बाहर खड़ा हो जाता। समर मानस से पीछा छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रहा था। एक बार मानस ने कॉल करके समर से पूछा “भाई फ्री है क्या घूमने चलें?” समर ने मानस से बचने के लिये जवाब दिया “यार मैं तो इटारसी के लिये निकल रहा हूँ कल आउंगा।” समर जैसे ही कमरे से बाहर निकला मानस बाहर ही खड़ा था। झूठ बोलने के चलते समर को इटारसी जाने का नाटक करना पड़ा। काफी परेशान होने के बाद उसे एक तरकीब सूझी। उसने सोचा की अगर कुछ ऐसा किया जाए कि मानस खुद ही उससे दूर भागने लगे। उसे पता था कि पैसे के कारण दोस्ती हमेशा खराब होती है।

अब मानस और समर जब भी साथ खाना जाते तो समर कभी फी पैसे नहीं देता, यहाँ तक अपनी गाड़ी में पेट्रोल भी मानस से भरवाता। समर ने एक दिन मानस से कुछ पैसे उधार माँगे। मानस ने पैसे एक बार में उधार दे दिये। समर ने कुछ दिन बाद फिर पैसे उधार माँगे। मानस ने कहा “यार तूने पहले के पैसे भी वापस नहीं किये” फिर भी मन मार के उसने पैसे दे दिये। मानस मे कुछ दिन बाद समर से पैसे वापस माँगे पर समर ने टाल दिया। काफी दिनों बाद जाकर आधे पैसे वापस किये। धीरे धीरे मानस और समर की दोस्ती में खटास आने लगी और मानस ने खुद ही समर से दोस्ती खत्म कर दी।



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