Thursday, 21st September, 2017

चलते चलते

समोसे पर GST की दर कम करवाने जेटली के घर रवाना हुए गडकरी और राजीव शुक्ला

30, Jun 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. जैसे ही ये खबर आई कि स्नैक्स/नमकीन वगैरह पर 12% जीएसटी लगने वाला है, नितिन गडकरी बेचैन हो उठे। बेचैनी के साथ-साथ उन्हें बहुत गुस्सा भी आ रहा था कि वित्त मंत्री जेटली की हिम्मत कैसे हुई समोसे पर इतना ज्यादा टैक्स लगाने की! उन्होंने तुरंत राजीव शुक्ला को फोन लगाया और कहा, “अब तो कुछ करना पड़ेगा यार! पहले अच्छा-भला 6% टैक्स लगता था, इस जेटली ने बढ़ा के 12% कर दिया, यानि सीधे दोगुना! ये हमारी सरकार है या कांग्रेस की!” उधर से शुक्ला जी की आवाज आई- “आप बिल्कुल सही कह रहे हैं गडकरी जी! मैं अभी आता हूँ आपके घर, फिर साथ चलेंगे जेटली जी से मिलने!”

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जेटली जी से हाथ जोड़कर विनती करते गडकरी

थोड़ी ही देर में दोनों जेटली जी के घर पहुँच गए। “जल्दी बताओ क्या काम है? मुझे अर्जेन्ट मीटिंग में जाना है!” -सामने मेज पर बिखरे पड़े काग़ज़ों को समेटते हुए जेटली बोले। गडकरी थोड़ा झेंपते हुए बोले- “वो एक ज़रूरी काम था आपसे!” “हाँ तो जल्दी बोलो!” -जेटली काग़ज़ों को बगल में दबाते हुए बोले। “हम लोग ना, समोसे का रेट कम करवाने के लिए आपके पास आए हैं! प्लीज समोसों पर जीएसटी की दर कम कर दीजिए!”-गडकरी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।

“हाँ, सीधे-सीधे डबल ही कर दिया है आपने तो! हमारे पेट का भी तो कुछ ख्याल रखिए!” -शुक्ला जी ने पेट पर हाथ फिराते हुए गडकरी की हाँ में हाँ मिलायी। यह सुनते ही जेटली जी का माथा गरम हो गया, लेकिन अपने गुस्से को निगलते हुए उन्होंने कहा- “देखिए समोसा जी..मेरा मतलब है गडकरी जी! आपके पेट को संभालने की जिम्मेदारी आपकी है, मेरी नहीं! अब हटिये सामने से, मुझे मीटिंग में जाना है!”

“अरे…अरे! आप तो नाराज हो गए! मैं आपके बंगले के सामने वाली सड़क को एकदम चकाचक कर दूँगा, वादा करता हूँ! बस आप किसी भी तरह समोसों का रेट कम कर दीजिए!” गडकरी ने हाथ जोड़ते हुए कहा तो शुक्ला जी भी जेब से कुछ टिकट निकालकर जेटली जी को थमाते हुए बोले- “और मेरी तरफ से ये लीजिए अगले साल के आईपीएल के दस टिकट…वीआईपी बॉक्स के!”

दोनों की हरकतें देखकर जेटली बिफर गए। “मेरे दिमाग का दही मत करो, मैं जा रहा हूँ, मुझे देर हो रही है! सेवाराम, इन्हें नाश्ता पानी कराकर विदा कर देना!” -जेटली ने अपने ‘कुक’ से चिल्लाते हुए कहा और निकल गये। दोनों का चेहरा उतर गया। दोनों अपने लटके हुए चेहरे लेकर सोफे से उठने ही वाले थे कि तभी अंदर से एक आदमी आया और उनके सामने नाश्ता रखकर चला गया। नाश्ते में समोसे देखकर दोनों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और सब कुछ भूलकर वे समोसों पर टूट पड़े।



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