Wednesday, 20th September, 2017

चलते चलते

'फ्रेंडशिप डे' का नाम बदलकर 'कृष्ण-सुदामा दिवस' करेगी सरकार, 'जय-वीरू' भी हैं दौड़ में

06, Aug 2017 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. ‘मुग़लसराय’ स्टेशन का नाम बदलने के बाद अब केंद्र सरकार ने ‘फ्रेंडशिप डे’ का भी नाम बदलने का फ़ैसला कर लिया है। ‘फ्रेंडशिप डे’ का नाम बदलकर ‘कृष्ण-सुदामा दिवस’ कर दिया जायेगा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि ‘मित्रता दिवस नामकरण एवं संशोधन अधिनियम 2017’ बिल अगले हफ़्ते संसद में पेश कर दिया जायेगा।

Krishna-Sudama
दोस्ती की मिसाल- कृष्ण-सुदामा और जय-वीरू

हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि अभी यह नाम फ़ाइनल नहीं है। इस नाम के अलावा कुछ अन्य नामों पर भी अभी चर्चा चल रही है। जिनमें ‘अटल-अडवाणी दिवस’, ‘जय-वीरू दिवस’ और ‘मोदी-शाह दिवस’ शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि ‘अटल-अडवाणी’ नाम से प्रधानमंत्री मोदी ख़ुश नहीं हैं, इसलिये इसके चांस ना के बराबर हैं।

मोदी जी के मुताबिक, अटल जी और अडवाणी जी में दोस्ती उतनी पक्की भी नहीं थी, जितना प्रचार किया जाता है। उन दोनों के बीच अक्सर मतभेद की ख़बरें आती रहती थीं।

‘जय-वीरू’ का नाम देश के बच्चे-बच्चे की ज़बान पर है। लेकिन ये दोनों फ़िल्मी कैरेक्टर हैं और फिर वीरू शराबी भी है। अगर इनके नाम पर रख दिया तो नयी पीढ़ी में अच्छा संदेश नहीं जायेगा।

इसलिये फ़ाइनल मुहर ‘कृष्ण-सुदामा’ के नाम पर ही लगने की उम्मीद है। सरकार मानती है कि ‘कृष्ण-सुदामा’ से हमारी प्राचीन संस्कृति और गौरवशाली इतिहास का भी प्रचार-प्रसार होगा और देश में अमीर-ग़रीब के बीच का अंतर भी कम हो जायेगा।

इसके बावजूद, सूत्र यह भी कहते हैं कि हो सकता है कि अंत में ‘मोदी-शाह’ पर ही मुहर लग जाये जाये। क्योंकि जैसी ट्यूनिंग मोदी जी और शाह जी में है, वैसी तो भगवान कृष्ण और सुदामा में भी नहीं रही।

उधर, इस बदलाव का विरोध भी शुरु हो गया है। विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि ‘फ्रेंडशिप डे’ का नाम ऐसे लोगों के नाम पर ही रखा जाना चाहिये, जो दारू पीने वाले हों। क्योंकि सारी दुनिया जानती है कि दुनिया में दारू पीने वालों से अच्छी दोस्ती किसी के बीच नहीं होती। दारूबाज़ दोस्त ‘दारू पार्टी’ के लिये एक फ़ोन करते ही सौ किलोमीटर दूर से भी चला आता है, जबकि नॉन-ड्रिंकर लोग एक-दूसरे से मिलने दो किलोमीटर तक भी नहीं जा पाते।



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