Tuesday, 24th April, 2018

चलते चलते

इंजीनियरों का बयान- "हमें नहीं पड़ता बजट से फ़र्क़, जब इनकम ही नहीं तो इनकम टैक्स का डर कैसा!"

02, Feb 2018 By Guest Patrakar

नयी दिल्ली. जिसका इंतज़ार हम सब बड़ी बेसब्री से कर रहे थे, वो आ चुका है! नहीं..नहीं, हम तैमूर अली ख़ान की बात नहीं कर रहे हैं, हम बात कर रहे हैं 2018 के बजट की! वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश कर दिया, जिसके बाद उन्हें मिडिल क्लास के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा लेकिन इसी मिडिल क्लास में कई ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें जेटली जी से कोई शिकायत नहीं है और वे हैं लगातार अपनी आबादी बढ़ाते जा रहे हमारे इंजीनियर भाई! इंजीनियर बिरादरी ने साफ़ कर दिया है कि बजट अच्छा हो या बुरा उन्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता!

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इनकम आने के ख़्वाब देखते तीन इंजीनियर

हमने ऐसे ही एक इंजीनियर बटुक लाल से बात की और इसका कारण जाना। बटुक ने कहा, “बजट से केवल दो ही लोगों को फ़र्क़ नहीं पड़ता एक तो वे जिनके पास अपार पैसा हो जैसे कि टाटा, अम्बानी और वाड्रा या फिर वे जिन पर ठेला भी ना हो, जैसे कि हम इंजीनियर! हर साल लोग बजट से लाखों तरह की उम्मीद लगाये बैठे होते हैं, जबकि हम केवल यह देखते है कि छोटी गोल्डफ़्लेक महँगी तो नहीं हुई। इसका सब से बड़ा कारण यह भी है कि हमारे पास इतना पैसा ही नहीं होता कि सरकार के टैक्स से हमें डर लगे। आज कल इंजीनियर को एक पकौड़े तलने वाले से भी कम पगार मिलती है। ऐसे हालात में हम किसी तरह इनकम टैक्स की पहली स्लैब तक ही पहुँच पाते है, तो डर कैसा?”

इंजीनियरों पर जेटली जी ने भी बयान दिया है और कहा है कि “हम कोई भी बजट बनाते वक़्त हर व्यक्ति विशेष को ध्यान में रखते हैं। हम ऐसा बजट बनाते हैं, जो सबके लिए अच्छा हो। हाँ, लेकिन हमने कभी इंजीनियरों के लिए बजट नहीं बनाया। क्योंकि ना तो वे हमें टैक्स देते हैं और ना ही वोट! वे तो चुनाव के दिन भी या तो ओवरटाइम कर रहे होते हैं या घर में बैठे रॉयल स्टैग के पैग चटका रहे होते हैं। ऐसे में उन्हें ध्यान में रखने का क्या फ़ायदा?”

हर बजट में लगातार इग्नोर किए जाने पर इंजीनियरों ने मोर्चा निकालने की भी सोची लेकिन फिर किसी ने उन्हें बताया कि पास के ही मंदिर में भंडारा हो रहा है तो वे सब मेस के खाने से बचने के लिए वहाँ चले गए। हालत ये हो गयी है कि अगर कोई इंजीनियर दो पेड लीव ले ले तो उसकी सैलरी माइनस में चली जाती है। ऐसे में सरकार कौन से लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की बात कर रही है राम ही जाने!



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