Tuesday, 25th July, 2017
चलते चलते

दिग्विजय सिंह ने किया बाबा रामदेव की पुस्तक 'करने से होता है' का अनावरण

08, Apr 2017 By Dharmendra Kumar

नयी दिल्ली. गोवा और मणिपुर में सशक्त सरकार बने, यह सुनिश्चित करने के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह इन दिनों सुर्ख़ियों में हैं। उनकी दूरदर्शिता और अनुभव का पूरा लाभ देश को मिल रहा है। हाल के संभाषणों में उन्होंने इस बात का विशेष तौर पर उल्लेख किया है कि खोई हुई ऊर्जा को पुनः प्राप्त करने का एकमात्र जरिया योग है। आधुनिक जीवन की आपा-धापी और बनते-बिगड़ते रिश्तों के बीच सामंजस्य बिठाना सरल नहीं है। योग करने से ही उन्हें स्वयं को ज़्यादा जानने का अवसर मिला है। राजनीतिक हलकों में कयास लगाये जा रहे हैं कि वो योग का सहारा लेकर भाजपा के करीब आना चाहते हैं।

Digvijay-Singh
बाबाजी की पुस्तक का विमोचन करते दिग्गी राजा

पतंजलि प्रकाशन की नयी पुस्तक ‘करने से होता है’ का विमोचन करने हरिद्वार पहुंचे श्री सिंह ने पार्टी बदलने की अटकलों को सिरे से ख़ारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि “जो कार्य बाहर से किया जा सकता है, उसे बाहर से ही करना चाहिए। मैंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कभी भी पद और सत्ता के लिए कोई काम नहीं किया। जनता का भला हो यही मेरी इच्छा रही है।” उन्होंने मुस्कुराते हुए आगे कहा, “राजनीति के सवाल-जवाब तो होते रहेंगे। पुस्तक विमोचन में आया हूँ, इस सम्बन्ध में भी तो कुछ पूछिए आप लोग!”

यह पूछे जाने पर कि, “क्या आपने ‘करने से होता है’ किताब को पढ़ा है?” उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में कहा कि “इस पुस्तक की एक प्रति मुझे मिली थी और मैंने पढ़ना शुरू भी किया लेकिन राजनीति की दौड़-भाग में इसे पूरा नहीं पढ़ पाया। परन्तु मुझे विश्वास है कि यह एक रोचक किताब होगी और लोग इससे प्रेरणा लेंगे। चेतन भगत वाली ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ के बाद यह पहली पुस्तक होगी, जिसे मैं पूरा पढ़ना चाहूंगा” पतंजलि योगपीठ की पहल को सराहते हुए उन्होंने सबको साधुवाद किया और कहा कि “समाज का सर्वांगीण विकास तभी सम्भव है जब हम सब मिलकर योग करें। जात-पात और उम्र की सीमाओं को लांघकर ही हम देश को नयी दिशा दे सकते हैं.”

एक पत्रकार के यह पूछने पर कि “क्या वे राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनना चाहेंगे?” दिग्विजय सिंह ने चुटकी बजाते हुए कहा, “पहले पद्मश्री तो मिल जाये!”



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