Monday, 24th July, 2017
चलते चलते

भारतीय हिरण समाज ने आयोजित की विशाल रैली, इंसानों को दिया अल्टीमेटम

29, Jan 2017 By bapuji

जोधपुर. अपने नीले ब्रेसलेट वाले भाईजान को भले ही कोर्ट ने हर आरोप से बाइज्ज़त बरी कर दिया लेकिन जंगल की जनता इस फ़ैसले से खुश नहीं है और इसके विरोध मे जोधपुर के जंगलों में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। काला हिरण समाज द्वारा आयोजित इस महारैली मे पूरे भारत से सभी प्रजातियों के हिरण भाइयों और बहनों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर कई प्रमुख हिरण नेताओं ने भाषण दिया और कोर्ट के फ़ैसले पर अपना विरोध दर्ज कराया। फ़ेकिंग न्यूज़ की जंगल डिवीजन ( जिसमें दो बंदर और एक गिलहरी शामिल है) ने इस रैली की रिपोर्टिंग की।

deer3
महारैली में भाग लेने आये हिरण

इस मौके पर मृत काले हिरण ‘जॉली’ के बचपन के दोस्त बंटी ने जॉली को याद किया और उनकी कुछ कहानियां भी सुनाईं। “वो बहुत अच्छा हिरण था, बस हरी पत्तियां ख़ाता था और दिन भर घूमता रहता था। इसी हरी घास के चक्कर में अपना जॉली किसी ‘ह्यूमन भाई’ की गोली का शिकार बन गया।” इस इमोशनल कहानी को सुनकर दिल्ली से आई कुछ हिरनियों की आँखे डब-डबा गयीं, जिन्हें बगल मे खड़े हिरनों ने तुरंत सहारा दिया।

उत्तर प्रदेश से आये दबंग हिरण मंटू ने पान के पत्ते थूकते हुए कहा कि “ई ससुरे को आदमी लोग भाई-भाई कहत रहत हैं, हमरी नज़र मे तो ऊ भाई एकदम नहीं है, हमें तो पूरा कसाई लागत है। उसको सजा देने के लिये हमें खुद क़ानून हाथ में लेना पड़ेगा।”

तमिलनाडू से आये पढ़े-लिखे हिरण सुंदरमंगलम ने मंटू से असहमति जतायी और क़ानून पर भरोसा जताते हुए कहा कि-“अभी हिम्मत नही हारना है। आदमी लोग अभी ऊपर के कोर्ट में जा सकता है। इसको अख़बार मे छापेंगे तो लोग सच्चाई को जानेगा और इसका पुँगी बजाएगा।”

वही महाराष्ट्र से आये मवाली हिरण फ्रेक्चर पांड्या ने कहा-“अपुन तो एकिच बात कह रेला है। इसका गेम बजाने का! वो पांडु लोग इसका कुछ नई उखाड़ सकता। मई तो बोलता है कि किसी साँप को इसका सुपारी देने का!” इस उग्रवादी विचारधारा का बिहार के माफ़िया हिरण रणविजय ने भी समर्थन किया और कहा कि वो कुछ ज़हरीले साँप को जानते भी हैं।

गुजरात के हिरण जिग्नेश, जो भीड़ को देखकर अपनी हरी घास की एक छोटी से दुकान लगा चुके थे, ने कहा कि भाईजान की ऊंची पहुच है। हमें भी जज के साथ कुछ ले-देकर सेटिंग कर लेनी चाहिये।” गोआ के हिरण गोमेज गोन्जाल्विस नशे मे धुत्त होने की वजह से मंच तक नहीं पहुच सके और नीचे ही गिर पड़े।

ख़ैर, इस महारैली के अंत में सर्वसम्मति से फ़ैसला लिया गया कि अगर जॉली को न्याय नहीं मिला तो उसकी पुण्यतिथि पर हम दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल रैली का आयोजन करेंगे और सींग मार-मारकर दिल्ली में बैठी इंसानों की सरकार की जड़ें हिला देंगे।



ऐसी अन्य ख़बरें