Wednesday, 25th April, 2018

चलते चलते

"लोग पैसा रखते हैं, इस वजह से होती हैं चोरियाँ"- संस्कृति मंत्री

02, Apr 2018 By Saquib Salim

नयी दिल्ली. केन्द्रीय संस्कृति मंत्री ‘श्री महेश ठेकेदार’ ने आज यहाँ एक सभा को संबोधित करते हुए उन आरोपों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि इस सरकार के कार्यकाल में पॉकेटमारी, चोरी एवं डकैती की वारदातें बढ़ गयी हैं। मंत्री जी ने कहा कि “ये सारी घटनाएं पाश्चात्य सभ्यता के अनुसरण के कारण हो रही हैं।” उनका कहना था कि अगर लोग बटुआ रखना छोड़ दें तो पॉकेटमारी की कोई घटना नहीं होगी।

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पश्चिमी सभ्यता की वजह से कट रही है लोगों की जेब

मंत्री जी ने कहा कि “बटुआ रखना और कपड़े में जेब सिलवाना, दोनों ही पाश्चात्य संस्कृति की देन हैं। भारतीय सभ्यता में ऐसा कदापि नहीं होता था। हमारे पूर्वज धोती पहनते थे, जिसमें कोई जेब नहीं होती थी और जब जेब ही नहीं थी तो बटुआ भी नहीं था। इस कारण कोई उनकी जेब नहीं काट पाता था। परन्तु अब लोग अंग्रेज़ी पतलून पहनते हैं और उसमें जेब लगवा लेते हैं, जिस कारण उनकी जेब कट जाती है। यदि लोग जेब में बटुआ ही नहीं रखेंगे तो जेब भी नहीं कटेगी!”

घरों में बढ़ रही चोरियों के बारे में उनका कहना था कि “ये हमारी बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था एवं विकास का प्रमाण है। पिछले सत्तर सालों में इतनी चोरियाँ नहीं हुई थीं क्योंकि तब लोगों के पास इतना पैसा ही नहीं था, जिसे चुराया जा सके। लेकिन आज बढ़ती हुई चोरियाँ इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि लोगों के घरों में पैसा है।”

उन्होंने विपक्षी दलों की उस मांग को भी संस्कृति के विरुद्ध बताया, जिसमें कहा गया था कि अगर दुकान के अन्दर दुकानदार ग्राहक को लूट लेता है तो इसको डकैती ही माना जाये। मंत्री जी ने कहा कि “ये हमारी संस्कृति का घोर अपमान है। सदियों से दुकानदार ग्राहक को भगवान मानता आया है और आज भी मानता है। दुकान एक मंदिर के समान है और इसमें भक्त भगवान से जो भी चाहे ले ले, उसको डकैती नहीं कहा जा सकता!”

चलते-चलते मंत्री जी ने कहा कि “जेब होगी तो उसमें पैसा होगा और पैसा होगा तो चोर तो चोरी करेगा ही! इसमें ग़लती चोर की नहीं, बटुए वाले की है। उसने पैसा क्यों रखा और रखा तो लेकर बाहर क्यों निकला? और जवानी में चोरों से ग़लतियाँ तो हो ही जाती हैं!”



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