Friday, 28th July, 2017
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गोबर का साइज़ कम करने के लिये गुजरात की गाय-भैंसें ले रही हैं डायटीशियन की मदद

05, Dec 2016 By Ritesh Sinha

अमरेली. जब से गुजरात की अमरेली नगरपालिका ने गाय/भैंस के गोबर का वज़न नापने का फैसला किया है, तब से अमरेली के सभी जानवर ख़ौफ़ के साये में जी रहे हैं। उन सभी पर लिमिटेड गोबर करने का भारी दबाव है। उन्हें डर लग रहा है कि अगर उन्होंने नगरपालिका द्वारा तय मात्रा से ज़्यादा गोबर कर दिया तो उनके मालिकों को गधे पर बिठाकर घुमाया जाएगा और इसका ठीकरा उन्हीं के पिछवाड़े फूटेगा।

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ज़्यादा गोबर करने पर एक गाय का चालान काटते हवलदार

ऐसा नहीं है कि गोबर के साइज़ को कम करने के लिये गाय-भैंसों ने अपनी ओर से कोई कोशिश नहीं की। कम चारा खाने से लेकर व्रत रखने तक वे कई तरीके आज़मा रही हैं लेकिन उनके गोबर का साइज़ जस का तस बना हुआ है।

फ़ेकिंग न्यूज़ के रिपोर्टर ने इस बारे में अमरेली की कुछ प्रसिद्ध गाय-भैंसों से बात की। अमरेली की लगभग हर सड़क पर गोबर कर चुकी एक बुज़ुर्ग भैंस ‘महिषेश्वरी देवी’ ने बताया कि- “वैसे, हमें अभी मुन्सीपाल्टी के ऑर्डर की कॉपी प्राप्त नहीं हुई है लेकिन डर के मारे अभी से हमारा गोबर निकलना बंद हो गया है।”

“पहले तो हम गोबर करने के बाद ‘घटनास्थल’ से चलती बनती थी लेकिन अब गोबर करने बाद हमें पीछे मुड़कर देखना पड़ता है कि कहीं ज़्यादा तो नहीं निकल गया।” -उन्होंने लाचारगी जताते हुए कहा।

“ये आदेश संविधान के खिलाफ है। ऐसा लगता है कि जिसने ये आदेश दिया है उसके ख़ुद के दिमाग में गोबर भरा हुआ है।” -उन्होंने रंभाते हुए कहा।

तभी महिषेश्वरी के बराबर में बैठी उनकी मौसेरी बहन सींगवती देवी बोल पड़ीं कि “ये मुन्सीपाल्टी वाले हमारी सीधाई का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। दम है तो यही आदेश गुजरात के शेरों के लिए भी जारी करके दिखायें! तब मैं देखती हूँ कि कौन जाता है उनके गोबर का साइज़ चेक करने! बात करते हैं!”–कहते कहते सींगवती के नथुनों से झाग निकलने लगे।

महिषेश्वरी ने किसी तरह उन्हें शांत कराया और फिर हमारे रिपोर्टर से बोलीं- “लेकिन हम भी क्या करें! अपने मालिकों की इज़्ज़त तो किसी ना किसी तरह बचानी है। इसलिये हम अहमदाबाद के एक टॉप के डायटीशियन के पास जाने वाली हैं, जो हमें गोबर का साइज़ कम करने के टिप्स बतायेगा।”



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