Sunday, 19th November, 2017

चलते चलते

विधायकों को रोकने के लिये काँग्रेस में होगी HR की नियुक्ति, सख़्त गठबन्धन policy बनाने की भी हुई मांग

30, Jul 2017 By Vish

नयी दिल्ली. केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी महासागर की तरह लगातार अपना आकार एवं फ़ैलाव बढ़ाती जा रही है, वो जहां से भी गुजरती है वहां की छोटी-मोटी नदियों को अपने अन्दर समाहित कर लेती है। पिछले दो दिनों में इस बीजेपी ने काँग्रेस के छः विधायकों को निगल लिया और काँग्रेस देखती रह गयी। सुनने में आया है कि अमित शाह ने मीडिया में बयान दिया है कि “जहां हम जीतते हैं वहां तो अपनी सरकार बनाते ही हैं लेकिन जहां नहीं जीतते, वहां तो पक्का अपनी सरकार बनाते हैं”।

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“अब देखता हूँ कौन जाता है पार्टी छोड़कर!”

यह सुनकर पूरा मोदी विरोधी खेमा बैकफ़ुट पर आ गया है। लालू, राहुल, मायावती, अखिलेश और ममता दीदी ने मिलकर तय किया है कि पहले जो रह गया है, उसे बचाया जाये, नये किले फ़तह करने की बाद में देखेंगे। ऐसे में इन सभी नेताओं ने मांग की है कि गठबन्धन को लेकर सख़्त नीति बनाई जाये। इस गठबन्धन पाॅलिसी में सरकार बनाने से लेकर छोड़कर जाने तक, सख़्त कायदे कानून बनाये जायें जिससे कि कोई चलती ट्रेन से ना कूदे और ऐसे भीषण दल-बदलू हादसों को टाला जा सके।

उधर, काँग्रेस अपनी पार्टी के भीतरी घमासान से परेशान है। उसके विधायक सूखे पत्तों की तरह पेड़ से टूटकर गिरे जा रहे हैं। ऐसे में अपने विधायकों को पार्टी छोड़कर जाने से रोकने के लिये काँग्रेस ने एक नायाब हल ढूंढ निकाला है। काँग्रेस ने अपनी पार्टी के लिये हर राज्य में एक HR नियुक्त करने का फ़ैसला कर लिया है।

एचआर आयेगी तो HR policies आयेंगी। इन policies में पार्टी को कैसे संचालित करना है, विधायकों से क्या अपेक्षाएं हैं, पार्टी में रहकर उन्हें कैसे अपने कार्य का निर्वाह करना है तथा एक विस्तृत एग्ज़िट प्रोसिजर का वर्णन रहेगा, जिससे विधायकों को पार्टी छोड़ते वक्त गुजरना पड़ेगा। अलग होने से पहले विधायकों को पार्टी को नोटिस देना होगा और इस्तीफ़े के बाद HR खुद उनका इंटरव्यू लेंगी। विधायकों को पार्टी ज्वॉइन कराते समय ही HR इन policies पर उनके साइन ले लेंगी ताकि आगे जाकर कोई मसला ना हो। इतना ही नहीं, ये HR दूसरे पार्टियों के विधायकों को भी लुभावने प्रस्ताव देकर अपनी पार्टी में शामिल करने का लगातार प्रयास करती रहेंगी।

जब मीडिया ने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गाँधी से इस खबर की पुष्टि मांगी तो उन्होंने अपने कुर्ते की आस्तीन ऊपर चढ़ाते हुए कहा, “देखिये! आजकल की politics में कोई honor नहीं बचा है, नेताओं में कोई credibility नहीं हैं। जब रूलिंग पार्टी काँग्रेस थी तो politics में honor था। ये जो honor है ना, यही सब कुछ होता है, बाकी हार जीत तो चलती रहती है। इसी honor को बचाने के लिये हमने decide किया है कि पार्टी में HR appoint करेंगे। HR आयेंगी तो सब सीधे हो जायेंगे और मज़ा भी बहुत आयेगा भैय्या!”



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