Wednesday, 25th April, 2018

चलते चलते

चूहा और चाय घोटाले के बाद आएगा चूरन घोटाला - महाराष्ट्र सरकार

30, Mar 2018 By Kumar Dharmendra

मुंबई. देश में घोटालों का कारोबार इतना क्रिएटिव हो जायेगा किसी ने सोचा नहीं था. घोटाला करना कल तक एक तबके के जीवन का हिस्सा था. इसको करना कराना आसान था, क्रियात्मक होना आवश्यक नहीं था. कई कई बार तो घोटालेबाज़ स्वयं भूल बैठता था की उसने कोई घोटाला भी किया है, पकडे जाने पर उसे विश्वास नहीं होता था की वह सच में पकड़ा गया है या चोर पुलिस खेल रहा है. मुश्किल ब मुश्किल अगर बात कोर्ट कचहरी तक पंहुची और खुदा न खासते अगर सजा भी हुई तो क्या हो गया. ८०० करोड़ का घोटाला कर लो ५ लाख का जुर्माना भर कर ४-५ साल जेल में निकाल लो और गंगा नहा लो. बस! जनता की भलाई में फिर लग जाओ.

बुरा हो डिजिटल दुनिया का जिसने ऐसे भले-चतुर लोगों का जीना हराम कर दिया। ऊपर से विमुद्रीकरण ने रही सही कसर निकाल दी. पता नहीं कितने दुर्दिन देखेंगे ये मासूम लोग.

चाय का स्वाद लेते फडणवीस
चाय का स्वाद लेते फडणवीस

महाराष्ट्र हमेशा से एक प्रोग्रेसिव राज्य रहा है और यहाँ की सोच भी प्रोग्रेसिव रही है. ऐसे में हमेशा कुछ नया कर गुजरने का उत्साह न सिर्फ यहाँ के लोगों में रहता है बल्कि नेतागण और उनके साइड किक्स भी इसी ताक में रहते हैं की कैसे एक ही झटके में कुछ नया करके इस दाल-रोटी के चक्कर से आज़ाद हो जाया जाये।

फडणवीस सरकार भले काम कर रही है, कम से कम मुख्यमंत्री जी को देखकर तो ऐसा लगता ही है लेकिन फिरकी लेने वाले न तब बैठे थे न अब बैठेंगे। अभी चूहा और चाय घोटालों ने साबित कर दिया की हर सेर पे सवा सेर होता है और चारा घोटाले के पार भी कोई दुनिया है. विपक्ष का काम होता है विरोध करना और मुद्दा ढूंढना सो उन्हें मौका मिल गया. अब संजय निरुपम सरीखे लोग जिनका पूरा करियर ज़्यादा बोलने पर डिपेंड करता हो उनको अब कोई कैसे चुप रख सकता था. उन्होंने अपने आवास पर ही प्रेस कांफ्रेंस बुला ली और कहा, “मुंबई के तीनों और समंदर है ऐसे में सरकार ४० लाख रूपये चूहों को भगाने के लिए कैसे खर्च कर सकती है. भागकर चूहे गए कहाँ और इसकी क्या गारंटी है की वे वापस नहीं आएंगे।”

पत्रकारों ने उन्हें इशारा किया की ये बात वे पिछली बार बोल चुके हैं कुछ और कहें, तब उन्होंने चाय घोटाले का भांडा फोड़ दिया। बोले, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दफ्तर (सीएमओ) में चार साल के दौरान करीब चार करोड़ रुपये की चाय पी गई, यह कैसे सम्भव हुआ. चाय तो मैं भी पीता हूँ, यह चारा थोड़े ही है। आज तक मुख्यमंत्री जी कौन से चाय पत्ती का ब्रांड पीते हैं यह तक लोगों को नहीं बताया। ऐसा लगता है सरकार चाय माफिया के आगे अपने घुटने टेक चुकी है, उन्हें मोरल ग्राउंड पे इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। ”

मीडियाकर्मी अब भी उनके बयान से संतुष्ट नहीं लग रहे थे स्थिति को भांपते हुए उन्होंने यह घोषणा की उन्हें पता चल चुका है की अगला घोटाला क्या सामने आने वाला है। सारे पत्रकार जो अबतक बीड़ी तम्बाकू और गप-सप में व्यस्त लग रहे थे एकाएक ही सबका ध्यान उन्होंने अपनी और खींच लिया। माइक को अपने हाथ में लेकर उन्होंने कहा, “फडणवीस सरकार जिस तरह विवादों में घिर चुकी है लगता चुनाव जल्दी ही होंगे और उसके लिए मुख्यमंत्रीजी को बड़े पैमाने पर चूरन की दरकार पड़ने वाली है, जिससे एक तरफ उनका और उनकी सरकार का हाजमा ठीक हो बल्कि दूसरी ओर जनता के बीच बांटने के लिए भी पर्याप्त हो. चूरन घोटाला समझो अब नहीं तो तब हुआ।”

पत्रकारों को बाईट मिल चुकी थी और दिहाड़ी से लौटते मजदूरों के चेहरे पर जो संतोष दिखता है उसी का प्रतिबिम्ब बने वे अपने-अपने ठिकानों की ओर कूच कर रहे थे. संजय जी भी फ़ोन पर आला कमान से अपनी रणनीति बनाने में व्यस्त हो गए थे।



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