Tuesday, 25th April, 2017
चलते चलते

रेलवे ट्रैक उखाड़ने में नाकाम रहे बैंगलौर के लोग, जाट और गुज्जरों से की मदद की अपील

15, Sep 2016 By Ritesh Sinha

बैंगलोर. कावेरी जल विवाद पर बैंगलोर के प्रदर्शनकारियों ने अपने आन्दोलन को और तेज़ करते हुए जाट और गुज्जरों से मदद मांगी है, ताकि वे भी बस और ट्रेनों को बड़ी मात्रा में फूँक सकें और रेल पटरियां उखाड़ सकें। बैंगलोर वालों को लगता है कि इतने दिनों तक आन्दोलन करने के बाद भी वे अभी तक एक भी रेल पटरी नहीं उखाड़ पाए हैं, जिससे उनकी बदनामी हो रही है। कुछ कन्नड़ प्रदर्शनकारी रेलवे ट्रैक पर गये भी थे लेकिन वे ट्रेन को आता देख डरकर भाग आये।

gujjar-protest
पटरी उखाड़ने का डेमो देते जाट-गुज्जर प्रदर्शनकारी

इसलिए उन्होंने इस काम में ऐसे लोगों की मदद लेने का फ़ैसला किया, जो इस काम में एक्सपर्ट हों। यही सोचकर उन्होंने जाटों और गुज्जरों से मदद की गुहार लगायी है। जाट और गुज्जरों ने भी उनकी इस रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट कर लिया है और वे जल्दी ही बैंगलोर के लिए ट्रेन से रवाना होंगे और बैंगलोर पहुँचते ही उसी ट्रेन को आग के हवाले करके इस अभियान की शुरुआत करेंगे।

बैंगलोर रवाना होने से पहले एक जाट नेता ने फ़ेकिंग न्यूज़ को बताया कि “बसों को फूंकने के बाद उसी आग में बीड़ी सुलगा के पीने में जो मज़ा है, वो माचिस या लाइटर से जलाने में कहां! लेकिन ये सब बैंगलोर वाले क्या जानें। वे तो बस माउस से खेलना जानते हैं, आग से खेलना इनके बस की बात नहीं! खैर, अब हम वहां जा रहे हैं, अब सब ठीक हो जायेगा।”

जाट नेता के बगल में ही बैठे एक गुज्जर नेता (जिन्हें पटरी उखाड़ने का बीस साल का अनुभव है) ने बताया कि “मुझे तो लगता है कि वे लोग आधे मन से आन्दोलन कर रहे हैं, कोई तड़क-भड़क है ही नहीं! अगर इसी स्पीड से चलते रहे तो वे 50 साल में भी पटरी उखाड़ना नहीं सीख पायेंगे। अच्छा किया जो उन्होंने हमें बुला लिया, हम दिखाएँगे उन्हें कि पटरी कैसे उखाड़ी जाती हैं।”

उधर, इस खबर के बाद कर्नाटक और केंद्र सरकार के हाथ पाँव फूल गए हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जाटों और गुज्जरों से कर्नाटक ना जाने की अपील की है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने ख़ुद को कमरे में बंद कर लिया है और प्रार्थना किये जा रहे हैं। उन्हें लगता है कि अब पटरियों को सिर्फ़ ऊपर वाले प्रभु ही बचा सकते हैं।



ऐसी अन्य ख़बरें