Wednesday, 22nd November, 2017

चलते चलते

"नोटबन्दी का असल मकसद था लोगों की फ़िटनेस सुधारना" - अरुण जेटली

02, Sep 2017 By Vish

एजेंसी. आरबीआई की सलाना रिपोर्ट आने के बाद अरुण जेटली जी ने नोटबन्दी के बचाव में जो प्रेस काॅन्फ़्रेंस रखा था वो भी नोटबन्दी की तरह ही फ़ेल हो गया। इस बार भी जेटली जी नोटबन्दी के पीछे के पहले बताये सारे मकसदों को खारिज करते हुए एक नया मकसद सामने लेकर आये और इसे सफ़ल करार दे दिया। उनके प्रेस काॅन्फ़्रेंस के बाद से ही देश के अलग अलग हिस्सों से लोगों के पेट पकड़ कर हँसने की और लोटपोट होकर ज़मीन पर गिरने की खबरें सुनने में आ रही थी।

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माफ़ी मांगते जेटली

हांलाकि बीजेपी ने इसे राष्ट्र-विरोधी तत्वों की साज़िश कहकर पहले उतना तूल नहीं दिया। पर जब खिल्ली उड़ाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ने लगी तो जेटली जी को एक बार फ़िर मैदान में आना पड़ा। अपने पहले प्रेस काॅन्फ़्रेंस के 2 दिन बाद ही जेटली जी ने एक और प्रेस काॅन्फ़्रेंस राखी और इस बार उन्होंने नोटबन्दी का असली मकसद बताया।

“नोटबन्दी की वजह से आम लोग भी विद्वान और काबिल ईकोनोमिस्ट बन गये। वो भी बिना डिग्री के और इतने कम समय में ही। नोटबन्दी का देश को ये एक अहम योगदान था और यही इसके पीछे का कारण..” जेटली जी बोल ही रहे थे कि बीच में उनका फ़ोन बजने लग गया। एक हाथ मुँह पर रखकर पीछे की ओर झुक कर वो फ़ोन पर खुस-फ़ुस करने लगे।

करीब 5 मिनट तक फोन पर बतियाने के बाद उन्होंने दोबारा मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “सुनिये सुनिये! अभी अभी नोटबन्दी के पीछे के कारण का लेटेस्ट वर्जन आया है। दरअसल इसका असली मकसद जनता के बीच फ़िटनेस को बढ़ावा देने का था। 50 दिन तक दिन भर लाईन में खड़े रहने के बाद आपके घुटने, कमर, पीठ सब मजबूत हुए कि नहीं, बताइये? यही अगर हम पहले बता देते तो आलस से कोई आगे नहीं आता। इसीलिये हमें ब्लैक मनी, ईकोनोमी, जीडीपी जैसे बड़े बड़े शब्द यूज़ करने पड़े। तो जब देश फ़िट हो गया तो हमारा मकसद भी पूरा हो गया फ़िर नोटबन्दी फ़ेलियर कैसे हुआ? हाँ तो जो मैंने पहले कहा उसे भूल जाइये और इसे ही फ़ाइनल करिये। कम से कम अगले क्वार्टर के रिज़ल्ट्स आने तक तो।”

ये सुनते ही वहां के रिपोर्टरों ने उनपर एक साथ कई सवाल दाग दिये। “मुझे अभी कैबिनेट रिशफ़ल की तैयारी करने जाना होगा, आप सब के सवाल मैंने नोट कर लिये हैं। इनके जवाब मुखिया जी अपनी अगली रैली में देंगे।” कहकर उन्होंने सभा समप्त की।

उनके इस बयान के बाद से ही लोगों का एक वर्ग खुशी से झूमने लग गया। सोशल मीडिया पर #DeMonetizationIsASuccess #FitPplFitEconomy #HatersGonnaBurn जैसे कई हैशटैग्स तेजी से ट्रेंड होने लग गये हैं। विशेषज्ञ तो इसे सरकार का मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं। और जो राष्ट्र-विरोधी लोग थे वो लाख कोशिशों के बाद भी इसकी कोई काट ढूंढ नहीं पा रहे हैं और उन्हें भी नोटबन्दी के फ़ायदों को मानना पड़ रहा है।



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