Saturday, 23rd September, 2017

चलते चलते

हमारे पास पहले से गोला-बारूद कम है, JNU में रखने के लिये कहाँ से लायें: सेना

25, Jul 2017 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. सीएजी द्वारा किए गये सन् 2016 के ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सेना के पास सिर्फ दस दिनों का गोला बारूद मौजूद है। जबकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कम से कम 40 दिनों का गोला बारूद सेना के पास हमेशा होना चाहिए। इस खुलासे के बाद सरकार की जमकर आलोचना भी हुई थी।

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जेएनयू को टैंक देने से इनकार करते आर्मी चीफ़ रावत

सीएजी की रिपोर्ट की आग तो सरकार पहले से झेल ही रही थी, अब JNU के वाइस-चांसलर की एक अजीबो-ग़रीब डिमांड ने उस आग में घी डालने का काम कर दिया है। वीसी जगदीश कुमार ने मांग कर दी है कि JNU कैम्पस में रखने के लिये उन्हें एक बड़ा सा टैंक दिया जाए, ताकि छात्रों में देशभक्ति जगाई जा सके। वैसे कैम्पस में टैंक रखने की मांग, फ्लो-फ्लो में की गई ‘मांग’ टाइप लगता है। उनकी इस मांग पर सेना ने जवाब दिया है कि “हमारे पास तो गोला-बारूद और टैंक की पहले से ही कमी है, अब JNU में रखने के लिये कहाँ से लायें?”

सेना के प्रवक्ता ने ग़ुस्से में भड़कते हुए पूछा कि “कौन हैं ये वाइस-चांसलर? बिना सोचे समझे कुछ भी बोल देते हैं! यहाँ हमारे पास अपने लिये ही टैंक्स नहीं हैं, और इन जनाब को JNU की पड़ी है। कुछ नहीं साब! ये सब उस पे चढ़ के सेल्फी लेने के लिए ही टैंक मांग रहे हैं। लेकिन सेना उनके इस जाल में फंसने वाली नहीं है। JNU के लड़के/लड़कियां वाइस चांसलर के कंधे पर रखकर बन्दूक चला रहे हैं! हमें सब पता है!” -कहते हुए उन्होंने टैंक देने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया।

उधर, सेना के इस बयान को सुनते ही JNU में निराशा छा गई। जेएनयू के एक होनहार छात्र, संकेत चारगुणा ने बताया कि “मैं भी खुश हो चला था कि चलो इसी बहाने हम भी ‘टैंक’ नज़दीक से देख लेंगे। लेकिन इन्होंने तो सारा प्लान ही चौपट कर दिया। खैर! कोई बात नहीं! हम भी टैंक देखने का कोई दूसरे रास्ता ढूंढ लेंगे!”



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