Saturday, 24th June, 2017
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राष्ट्रगान के तुरंत बाद पिटने वालों के लिए सिनेमा हॉल के बाहर तैनात होंगी एंबुलेंस

20, Dec 2016 By Pagla Ghoda

मुम्बई. सिनेमा हॉल में फिल्म से पहले जब राष्ट्रगान चलता है, उस समय जो व्यक्ति अपनी सीट से उठ कर खड़े नहीं होते, उनके लिए अब एक खुशखबरी है। उनके इस ‘राष्ट्र-द्रोही’ कृत्य के लिए जब उनके आस-पास के लोग उन्हें पीटेंगे तो उन्हें अपने इलाज की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। ‘झक्कास प्रयास’ नामक एक NGO अब देश के कई बड़े सिनेमाघरों के बाहर एम्बुलेंस सुविधा प्रदान करने का इंतज़ाम कर रहा है।

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सिनेमाघर की ओर रवाना होता राष्ट्रभक्तों का जत्था

रोहित नामक एक युवक जो कि इस कृत्य के कारण पीटा जा चुका है, उसने बताया, “पिछले हफ्ते मैं मूवी देखने पास के एक सिनेमा हॉल गया। मूवी शुरू होने से पहले मैं बस आँखें बंद करके हैडफ़ोन लगा के फोन पर गाने सुन रहा था। इतने में किसी ने मुझे ज़ोर से थप्पड़ मारा और मैं उठ गया, उसके तुरंत बाद कुछ लोगों ने मुझे पीटना शुरू कर दिया। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मेरी गलती क्या है। फिर मुझे बताया गया कि मैंने देश के साथ गद्दारी की है, कुछ लोग मुझे पाकिस्तान वाली ट्रेन में बिठाने की बात करने लगे, क्योंकि उनके अनुसार मैं ISI का एजेंट हूँ। मेरी पीठ पर लातें मारने वाले एक इंसान ने तो एक ट्रेवल वेबसाइट पे टिकट भी ढूंढ लिया था मुम्बई से कराची की अगली फ्लाइट का। बाद में मुझे पता चला कि हुआ ये था कि बीच में राष्ट्रगान चला और मुझे पता नहीं चला।”

“खैर लगातार पांच मिनट तक चले इस ‘देशभक्ति-प्रशिक्षण’ की वजह से मेरे फोन की स्क्रीन क्रैक हो चुकी थी, पैर की एड़ी में ज़ोरदार क्रेम्प था। मैंने सबसे क्षमा मांगी और सोचा हॉस्पिटल चलूँ तभी बाहर एम्बुलेंस खड़ी दिखी तो मेरी जान में जान आयी।” -रोहित ने पैर को सहलाते हुए कहा।

जगजीत नामक एक और युवक जो राहुल की पिटाई के समय वहां मौजूद था, उसने भी इस मामले में अपने विचार व्यक्त किये। पास की ताज़ा पेंटेड सफ़ेद दीवार पर पान थूकते हए हुए जगजीत ने कहा, “इतना ज़्यादा पीटना नहीं चाहिए था लड़के को, कुछेक थप्पड़ लगा के छोड़ देते। अगली बार से याद रखता कि कब देश का सम्मान करना है कब नहीं। हम पांच-छह लड़कों का ग्रुप तो रेगुलरली मूवी देखने जाता है सिर्फ इसलिए कि देखें कौन ससुरा देशद्रोही राष्ट्रगान का सम्मान नहीं कर रहा। हम वहीं धर लेते हैं साड़े को, खोपचे में लेके खर्चा-पानी देते हैं और छोड़ देते हैं। कानून तो कोर्ट ने अभी बनाया है, तो उसका पालन होने में टाइम लगेगा। पुलिस भी करेगी अपनी कानूनी कार्यवाही, पर तब तक हमारा फ़र्ज़ है कि उस कानून को हम लागू करवाएं, चाहे उसके लिए हमें कुछ भी करना पड़े।”

रोशन नामक एक युवक जो राहुल को पीटने में डायरेक्टली शामिल था, उसने कहा, “देखिये ये एम्बुलेंस का नाटक क्या है, मैं नहीं जानता साहब! लेकिन सच बोलूं तो मैं तो गद्दार की सुनता नहीं हूँ ऐसे मामलों में, रख के लगा देता हूँ कान के नीचे! एक और दिन की बात बताता हूँ, पिछले हफ्ते मैं RTO ऑफिस गया था अपना कार का लाइसेंस बनवाने। वहां सरकारी बाबू ने कहा सर बहुत सारी एप्लीकेशन हैं, आप थोड़ा इंतज़ार कीजिये। मैंने कहा यार सौ-पचास ले के मामला ख़तम करो ना! नोटबंदी का टाइम है तब भी हार्ड कैश देने को तैयार था। लेकिन वो ससुरा ज़्यादा ईमानदारी झाड़ने लगा। मैंने कहा कि यार तुम लोग इतना धीरे काम करोगे तो देश का क्या होगा, फिर भी वो नहीं माना। मैंने लगाए दो उसकी कनपटी के नीचे। भाई, देश से बढ़के कुछ नहीं है अपने लिए।”



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