Thursday, 19th January, 2017
चलते चलते

पर्वतों और जंगलों में 4G का ज़बरदस्त नेटवर्क देख सॉफ्टवेयर इंजीनियर नें वन में ही बसाई कुटिया

03, Nov 2016 By Pagla Ghoda

बांदीपुर अभयारण्य: मुम्बई के पॉश इलाकों के निवासी रह चुके सॉफ्टवेर आर्किटेक्ट सुकेश भगनानी आजकल बांदीपुर नेशनल पार्क में जा बसे हैं। उन्होंने बाकायदा वनमें अपनी कुटिया बना ली है, और वहीं कंद मूल खाकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जिस कारण उनके परिवार वाले काफी चिंतित हैं। परंतु सुकेश स्वयं अपनेइस फैसले से बहुत खुश हैं। जब वो शाम को वन में सैर करने के लिए निकले तो हमने उनसे इस बारे में बातचीत की। एक पेड़ से अमरुद तोड़ते हुए उन्होंने बताया, “देखिये मेरा सारा काम तो इन्टरनेट और टेलीफोन से हो जाता है। और इन दोनों का ही नेटवर्क शहरों में आना लगभग बंद हो चुका है। लेकिन टीवी में दिखाते हैं कि जंगलो, पहाड़ियों और गुमनाम जगहों पर 4G का नेटवर्क बहुत ज़बरदस्त आता है। इसीलिए मैं यहाँ प्रकृति की गोद में शिफ्ट हो गया हूँ।”

जंगल में मोबाइल पर बात करते सुकेश
जंगल में मोबाइल पर बात करते सुकेश

जब उनसे पूछा गया कि उन्हें यहाँ बियाबान में अकेले डर नहीं लगता तो उन्होंने हँसते हुए कहा, “भाईसाहब शेर और चीतों की दहाड़ों से डर तो लगता है, लेकिन यहाँ रहने के फायदे तो सुनो? यहाँ 4G का नेटवर्क इतना भयंकर है के विडियो एकदम स्मूथ स्ट्रीम करता है। मुम्बई में मेरे घर में तो गोल चक्कर घूमता रहता था। बिल फिर भी पूरा 4G का ही वसूल होता था। अब मैं नेटफ्लिक्स पर अपने पसंदीदा धारावाहिक आराम से देख पता हूँ। लड़कियों से घंटो व्हाट्सैप पर चैटिंग कर पाता हूँ। क्लाइंट्स से VIP कॉल्स कर पाता हूँ। ये सब शहरों के तथाकथित 4G नेटवर्क पर संभव नहीं है। वहां तो गूगल खुल जाए तो गनीमत। तो आप ही बताइये कोई वो क्यों ले?”

उसके तुरंत बाद सुकेश नें हमें स्पीडटेस्ट वाली वेबसाइट खोलकर अपने 4G इन्टरनेट की रिकॉर्ड तोड़ स्पीड दिखाई, तो हमारी आँखें भी फटी की फटी रह गयी। लेकिन वन में बस जाने की इस मुहिम में सुकेश अकेले नहीं हैं। कहा जा रहा है कि फेसबुक, गूगल और एडोबी जैसी कई बड़ी कंपनियां अब पर्वतों और जंगलों में अपने बड़े बड़े ऑफिस खोलने पर विचार कर रहीं हैं। प्रेस और मीडिया में तो ये कंपनियां दावा कर रहीं हैं के ये अपने मुलाज़िमों को प्रकृति से जोड़ने का एक उच्चस्तरीय कदम हैं परंतु विशेषज्ञों की मानें तो पर्वतों और जंगलों में प्रोवाइड किया जाने वाला अति-उत्तम 4G नेटवर्क ही उन्हें अपने शहरों के ऑफिस बंद करके जंगलों में ऑफिस खोलने के लिए प्रेरित कर रहा है।



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