Tuesday, 17th January, 2017
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रैप गीतों मे 'बेबी', 'दारू' और 'पार्टी' जैसे शब्द होने ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट

17, Oct 2016 By bapuji

नयी दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फ़ैसले में रैप गीतो पर नये दिशा निर्देश जारी किये हैं। ये फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट की सात जजो की खंडपीठ ने सीनियर रैपर यो यो हनी सिंह बनाम उभरते रैपर मोन्टी खनूजा के केस में सुनाया। मोन्टी खनूजा के नये एलबम ‘बेरोज़गारी: एक बीमारी’ के कई रैप गाने बड़े अजीब से थे। उनमें न तो दारू, ना ही किसी पार्टी का ज़िक्र था, जिन्हें सुनकर देश का युवा समाज काफ़ी भ्रमित था और इससे देश की वर्षों पुरानी रैप संस्कृति को भी ख़तरा था। ऐसे में श्री यो यो हनी सिंह जी, जो कि भारतीय रैप समाज के संयोजक और वरिष्ठ रैपर माने जाते है, ने सुप्रीम कोर्ट में इस एलबम के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

Yo Yo
बेबी, दारू और पार्टी वाला आदर्श रैप सॉन्ग

कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार अगर किसी रैप गीत मे “बेबी”, “दारू” और “पार्टी” शब्द या किसी कार या लड़की की खूबसूरती का जिक्र नही होगा तो उस गीत को रैप श्रेणी मे नही रखा जा सकता। इसके अलावा हर रैप गीत मे कम से कम 3 नाचती फिरंगी हसीनाओं का दिखाना अनिवार्य है। लगभग सौ पन्नों में दिये इस फ़ैसले में कोर्ट ने कहा है कि “बदलाव अपनी जगह ठीक है पर इसका ये मतलब नहीं कि हम सब कुछ भूल जायें। रैप गीतों की परंपरा और संस्कृति को भुलाया नहीं जा सकता और इसकी सुरक्षा करना कोर्ट का धर्म है।” पूरे केस के दौरान यो यो के वकील प्रशांत भूषण ने सबूत के तौर पर कोर्ट में कई हिट गाने चलाए, जिनमें “बेबी का बर्थ डे बैश”, “डोप शोप”, “47 वेट कुडी दा” जैसे मशहूर गाने शामिल हैं।

कोर्ट का फ़ैसला आते ही श्री यो यो ने ट्वीट कर के इसे सच्चाई की बुराई पर जीत बताया और फ़ैसले की तारीफ़ की। यो यो के दुश्मन माने जाने वाले रैपर बादशाह और तीव्र गति से गाने के लिए मशहूर रैपर रफ़्तार ने भी फ़ैसले पर संतोष जताया और कहा कि वे तो हमेशा से ऐसे ही गाने बनाते रहे हैं और उम्मीद है कि नये रैपर कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन करेंगे। वहीं, कोर्ट में लड़ाई हार जाने वाले नये ज़माने के रैपर मोन्टी खनूजा ने फ़ैसले पर असंतोष जताया है और कहा कि ये फ़ैसला हमारे मूल अधिकारों का हनन है और वो एक एनजीओ बनाकर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।



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