Friday, 24th November, 2017

चलते चलते

अब 'गुप्त रोग' वाले पोस्टर पर भड़के पहलाज, बोले- "शीघ्र-पतन में से 'पतन' हटाओ"

03, Aug 2017 By बगुला भगत

मुंबई. सेंसर बोर्ड के चीफ़ पहलाज निहलानी ने अब बॉलीवुड से बाहर के लोगों को भी लपेटना शुरु कर दिया है। उनके संस्कारों की गाज़ आज एक ‘गुप्त रोग’ वाले पोस्टर पर गिर गयी। पहलाज आज सुबह जब सेंसर बोर्ड की बिल्डिंग में अपनी कार पार्क कर रहे थे, तभी उनकी नज़र दीवार पर चिपके एक पोस्टर पर पड़ी। जिस पर लिखा था- ‘शीघ्र-पतन, धात, स्वप्नदोष के रोगी मिलें, भारत प्रसिद्ध गोल्ड मैडलिस्ट डॉ. शेख़’। पोस्टर पर डॉ. शेख़ का मोबाइल नंबर भी लिखा था।

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आँखें फाड़कर पोस्टर को देखते हुए पहलाज जी

पहलाज 10 मिनट तक उस पोस्टर को देखते हुए बड़बड़ाते रहे, फिर उन्होंने उस पर लिखा नंबर मिलाया और ग़ुस्से में पूछा, “तुम डॉक्टर शेख़ बोल रहे हो?” “जी हाँ, भाईसाब। बताइये क्या प्रॉब्लम है आपको- शीघ्र-पतन, धात, सपन-दोष…?” -उधर से आवाज़ आयी। यह सुनकर पहलाज और भड़क गये और चिल्लाते हुए बोले- “मैं गुप्त रोगी लगता हूँ क्या तुमको?”, इस पर डॉक्टर ने हँसते हुए कहा- “ऐसे देखने से तो किसी का भी पता नहीं चलता…”

तो पहलाज बीच में ही बात काटते हुए बोले- “मैंने इलाज के लिये फ़ोन नहीं किया तुम्हें!” “तो फिर काहे को किया?” -डॉ शेख़ ने हैरानी से पूछा। “तुम्हारे पोस्टर में जो शब्द लिखे हैं, वे बहुत गंदे और अश्लील है। इन्हें काटकर ठीक करो!” “मतलब?” -उसने इस बार डबल हैरानी से पूछा।

“मतलब…शीघ्र-पतन में से ‘पतन’ को हटाओ, सिर्फ़ ‘शीघ्र’ रहने दो और स्वप्न-दोष में से ‘स्वप्न’ को काटो, बस दोष रक्खो!” -पहलाज पोस्टर को पढ़ते हुए बोले। “ऐ भाई, तेरे को मेरी नहीं, दिमाग़ के डॉक्टर की ज़रूरत है।” -यह कहकर उधर से फ़ोन काट दिया।

पहलाज जी ने दोबारा मिलाया तो “यह नंबर मौजूद नहीं है” की आवाज़ आने लगी। फिर उन्होंने जेब से पेन निकाला और पोस्टर पर लिखे शब्दों में ख़ुद ही काँट-छाँट करने लगे। जब ये सब करेक्शन कर चुके तो थोड़ी देर पोस्टर को देखकर मुस्कुराते रहे और फिर अपने ऑफ़िस की और बढ़ गये।



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