Wednesday, 13th December, 2017

चलते चलते

फ़ेकिंग फ़िल्म रिव्यूः कहानी 2

02, Dec 2016 By बगुला भगत

सबसे पहले तो डायरेक्टर के फ्रॉड की बात! ये ‘कहानी’ का सीक्वल-वीक्वल कुछ नहीं है भाईसाब, बल्कि उसकी अगली इंस्टॉलमेन्ट है। जब उस फिलिम से इसका कुछ लेना-देना ही नहीं है तो फिर ‘कहानी 2’ क्यूँ रक्खा इसका नाम? इसमें बस विद्या बालन सेम है और कुछ नहीं! ‘कहानी’ में विद्या का नाम विद्या बागची था और इसमें विद्या सिन्हा है। अब अगली वाली (कहानी 3) में विद्या टैगोर होगा। हंड्रेड परसेंट!

Kahaani
“क्या? वो खुले में शौच कर रहा है!”

चलो ख़ैर, आपको ये बताता हूं कि फिलिम की स्टोरी क्या है। लेकिन यार स्टोरी तो बता ही नहीं सकता। सस्पेंस-मिस्ट्री फिलिम है ना! चलो, कुछ-कुछ बता देता हूं।

तो भैय्या! फिलिम में विद्या सिन्हा (विद्या बालन) एक काम-काजी महिला है, जिसकी बेटी मिनी है। एक रात को विद्या उसे ढूंढने निकलती है। जब वो निकलती है, तो लगता जैसे वो सड़क के किनारे खुले में शौच करने वाले लोगों को उठाने निकली है। सरकार ने वो ‘शौचालय मतलब सोच’ वाली एड इतनी दिखा दी कि अब लगता है कि ‘विद्या मतलब शौच’!

ख़ैर, तभी सड़क पे उसका एक्सीडेंट हो जाता है और वो कोमा में पहुंच जाती है। इंस्पेक्टर इंदरजीत (अर्जुन रामपाल) उसे देखकर कहता है- “अरे ये तो दुर्गा है!” फिर वो विद्या की डायरी पढ़ता है, जिसमें उसे विद्या का राज़ पता चलता है। वो इतना लल्लू दिखाया है कि उस स्कूल डायरी, जिसके सिर्फ़ आधे पन्ने भरे हैं, को पढ़ने में कई दिन और रात लगा देता है। बताओ, स्कूल डायरी पढ़ने में इत्ता टाइम लगता है क्या!

वो कहीं से भी इंडिया का इंस्पेक्टर नहीं लगता। प्रमोशन पाने के लिये केस सॉल्व करता रहता है। उसे पता ही नहीं है कि हमारे पुलिस डिपार्टमेंट में प्रमोशन पाने के लिये थामने पड़ते हैं। उसकी वाइफ़ भी उसी की टक्कर की लुल्ल दिखायी है। उसका पति घर में किसी दूसरी औरत की डायरी पढ़ रहा है और वो ज़रा भी शक नहीं करती! यानि फिलिम का कोई भी कैरेक्टर इंडिया का है ही नहीं!

अब अगला कमाल देखो! कालिमपोंग शहर की पुलिस दुर्गा को ढूंढती हुई चंदन नगर आती है, वो भी पूरे 8 साल बाद! इत्ती लेट? इसीलिये बंगाल इतना पिछड़ा हुआ है। एक बात और, इस फिलिम में हीरोइन के अलावा सारी औरतें बुरी हैं। एक औरत तो पूरी फिलिम में ब्लेड लेकर घूमती रहती है। ऐसा लगता है जैसे ‘टोपाज़’ की एड कर रही है।

अब बात एक्टिंग की! विद्या बालन को तो अच्छी एक्टिंग का चस्का लग गया है, हर फिलिम में अच्छी एक्टिंग करके दिखाती है। बहोत बनती है वो! अर्जुन रामपाल ने नाम तो दो-दो लोगों का रक्खा हुआ है और एक्टिंग एक आदमी के बराबर भी नहीं करता। लेकिन ये बॉलीवुड वाले भी मानेंगे नहीं! उससे एक्टिंग करवाके ही छोड़ेंगे। और वो अकेला बंदा नहीं है इस फिलिम में दो-दो नाम वाला। जुगल हंसराज भी है- ‘जुगल’ भी और ‘हंसराज’ भी! वो ही, जो 20 साल पहले ‘पापा कहते हैं’ में ‘चिकनी चमेली’…मेरा मतलब चिकना लौंडा बनके आया था। अंकल बना है वो इसमें!

इनके अलावा और भी लोग हैं फिलिम में, जिनका पता आपको फिलिम देखने पर ही चलेगा। तो, हमारी तरफ़ से ‘कहानी 2’ को मिलते हैं- सौ-सौ के तीन नोट!  विद्या के लिये!sau-sau1