Sunday, 28th May, 2017
चलते चलते

फ़ेकिंग फ़िल्म समीक्षाः डियर ज़िंदगी

25, Nov 2016 By बगुला भगत

डियर पाठको! ‘डियर ज़िंदगी’ की सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें शाहरुख़ और आलिया की रोमांटिक जोड़ी नहीं है। शाहरुख़ इस फ़िल्म में जहांगीर अंकल बने हैं, इसलिये आलिया शाहरुख़ से बच गयी और हम दोनों की जोड़ी से बच गये। सोचिये! अगर शाहरुख़ और आलिया फ़िल्म में रोमांटिक कपल होते और उस समंदर वाले सीन में हाथ पकड़कर चलते तो ऐसा लगता जैसे बाप अपनी बेटी को गुब्बारा दिलाने ले जा रहा है।

Dear Zindagi3
‘एक्टिंग करनी पड़ेगी’ -यह सुनते ही आलिया रोने लगी

‘डियर ज़िंदगी’ के पहले सीन में हमें पता चलता है कि कायरा (आलिया भट्ट) सिनेमेटोग्राफ़र है। इसके बाद हमें फ़िल्म के लास्ट वाले सीन में ही पता चलता है कि वो सिनेमेटोग्राफ़र है। इस बीच पूरी फ़िल्म में वो अपनी दीवार पर फोटू बदलती रहती है। उसके कमरे की दीवार उन लड़कों के फ़ोटुओं से अटी पड़ी है, जिन्हें उसने डेट किया है। भगवान जाने, उसने सिनेमेटोग्राफ़ी कब सीखी! बेचारी नन्हीं सी जान! पूरी दीवार भरने के लिये उसे कितनी मेहनत करनी पड़ी होगी।

कायरा को पता नहीं है कि उसके साथ प्रॉब्लम क्या है, इसलिये वो डॉक्टर जहांगीर ख़ान (शाहरुख़) से मिलती है। जो उसे समझाता है कि जैसे कुर्सी लेने से पहले हम कई कुर्सियों को ट्राई करते हैं, वैसे ही असल ज़िंदगी में करना चाहिये। कायरा को बात समझ में आ जाती है और फ़िल्म के अंत में चौथी कुर्सी (आदित्य रॉय कपूर) पर बैठ जाती है, जहां पहली तीन कुर्सियां (कुणाल कपूर, अंगद बेदी, अली ज़फ़र) भी रखी हुई हैं।

वैसे, ये शाहरुख़ की एक्टिंग का ही कमाल है कि उन्हें सम्राट बना लो, साइंटिस्ट बना लो या फिर डॉक्टर! वो हमेशा एक जैसे ही लगते हैं। वो उन फालतू एक्टर्स की तरह नहीं हैं, जो हर फ़िल्म में गिरगिट की तरह कैरेक्टर के हिसाब से रंग बदलते रहते हैं।

शाहरुख़ उस सीन में बहुत जमे हैं, जिसमें वो आलिया के साथ ‘साइकिल राइड’ पर निकलने से पहले साइकिल रिपेयर करते हैं, इसीलिये फ़िल्म में उन्हें ‘साइकोलॉजिस्ट’ कहा गया है, ना कि डॉक्टर होने की वजह से!

और आलिया का तो ख़ैर कहना ही क्या! जहां, बॉलीवु़ड की ज़्यादातर अभिनेत्रियां इस बात से दुखी हैं वे अपनी उम्र से बूढ़ी लगती हैं, वहीं बेचारी आलिया की प्रॉब्लम ये है कि वो बच्ची ही लगती है- शक्ल से भी और एक्टिंग से भी! उसे कायरा के बचपन वाले रोल के लिये सलेक्ट किया जाना था लेकिन शाहरुख़ और करण जौहर उसे इतना लाड़ करते हैं कि उसे ज़बरदस्ती एडल्ट कायरा वाला रोल दे दिया। जब वो कैमरे में झांकती है, तो लगता है जैसे कोई बच्चा अपने पापा के साथ फ़िल्म के सेट पर आ गया है।

और हां, फ़िल्म देखने के बाद ये मत कहना कि गौरी शिंदे ने गोरे लोगों की फ़िल्म ‘Good Will Hunting’ की नकल की है। ‘गुड विल हन्टिंग’ में विल (मैट डैमन) एक मैथ्स जीनियस है, जबकि ‘डियर ज़िंदगी’ में आलिया भट्ट सिनेमेटोग्राफ़र! अगर गौरी ने आलिया को भी जीनियस दिखा दिया होता, तो बेचारे दर्शक अपनी डियर ज़िंदगी से हाथ धो बैठते।

तो हमारी तरफ़ से डियर ज़िंदगी को मिलते हैं पांच में से दो बैंगन! Baingan- Award