Saturday, 16th December, 2017

चलते चलते

फ़ेकिंग फ़िल्म रिव्यूः रनिंग शादी

17, Feb 2017 By बगुला भगत

पहले मेन बात सुनो भाईसाब! ‘रनिंग शादी डॉटकॉम’ में हीरो और उसका दोस्त एक ऐसी वेबसाइट बनाते हैं, जो उन प्रेमी जोड़ों की मदद करती है, जो घर से भागकर शादी करना चाहते हैं। लेकिन मैं डायरेक्टर साब से पूछता हूं कि ये कौन सा बड़ा काम है? ये तो इंडिया में कोई भी कर लेगा। असली काम है शादी होने के बाद जोड़ों की हिफ़ाज़त करना, उन्हें सिक्योरिटी देना क्योंकि असली पंगा तो यहां शादी के बाद ही शुरु होता है।

Runningshaadi
इन्हें कहना चाहिये था कि “झेलोगे आप”

अगर पिच्चर में वो करके दिखाते तो हम भी मान जाते! तो हीरो और उसके दोस्त को ऐसी वेबसाइट बनानी चाहिये थी, जो शादी के बाद सिक्योरिटी दे और उन्हें मरने से बचाये और पिच्चर का नाम ‘रनिंग शादी’ के बजाय ‘सिक्योरिंग शादी’ होना चाहिये था। है कि नहीं!

और कमाल देखो! ये लोग घर से भागने वालों की पचास शादी करा देते हैं और सही-सलामत रहते हैं। भाईसाब, पंजाब में ऐसा सचमुच में करके देखो। 5वीं शादी से पहले ही वेबसाइट के साथ-साथ ख़ुद भी हैक ना हो जाओ तो हमारा नाम बदल देना! ख़ैर छोड़ो!

तो रनिंग शादी का कहानी-क़िस्सा ये है कि पंजाबी हीरोइन निम्मी (तापसी पन्नू) के पापा की साड़ी-लहंगों की दुकान है। दुकान पे बिहारी रामभरोसे (अमित साध) काम करता है। भरोसे अपने दोस्त साइबरजीत (अर्श बाजवा) के साथ मिलकर ऐसी मेट्रीमोनियल वेबसाइट बनाता है, जो उन प्रेमी जोड़ों की भागकर शादी करने में मदद करती है। फिर बाद में हीरो-हीरोइन अपनी ही शादी के लिये भाग जाते हैं। भागते नहीं हैं बल्कि बेचारे बिहारी हीरो को बिना बताये भगाकर ले जाती है ये पंजाबन हीरोइन!

डायरेक्टर ने पिच्चर में बिहारियों की बहुत बेइज़्ज़ती की है भाईसाब! ख़ास तौर पे महिलाओं की! एक बिहारन का जित्ता अपमान इस पिच्चर में हुआ है, आज तक कहीं नहीं हुआ। पंजाबन जब देखो तब हमारे बिहारी हीरो पर टॉन्ट कसती रहती है कि “जा कर ले उस बिहारन से शादी!” उस बिचारी का लेना एक ना देना दो, उसकी फालतू में इंसल्ट करती रहती है।

और वो हीरो को भी बात-बात पे ताना मारती रहती है- “तू बहुत बड़ा फट्टू है।” जबकि उससे बड़ी फट्टू वो ख़ुद है। वैसे तो पहले ही सीन में बोल देती है कि “मैंने सेक्स किया है” और कॉन्डम भी ख़ुद खरीदती है लेकिन अपने घरवालों से इत्ता नहीं कह सकती कि “मैं इससे शादी करना चाहती हूं!” वो हर जगह हमारे बिहारी हीरो को दबाकर रखती है। यहां तक कि जब शादी के लिये उसे लेकर भागती है, तो उस बेचारे से उसकी मर्ज़ी भी नहीं पूछती। बस लेकर भाग जाती है।

डायरेक्टर साब, आपकी पिच्चर में थोड़ी-बहुत हंसी तभी आती है, जब स्टोरी पटना पहुंचती है और हीरो के बिहारी मामा (ब्रिजेन्द्र काला) और होने वाले साले सिन्हा जी (पंकज झा) परदे पे आते हैं, नहीं तो दर्शक हंसने के लिये तरसते ही रहते हैं। हंसाने वाली ज़्यादातर लाइनें मामा और साले जी के हिस्से में ही आयी हैं।

और हम झूठ नहीं बोलेंगे! तापसी पन्नू और साध ने काम सधा हुआ किया है और दोनों की जोड़ी अच्छी भी लगी है। वैसे एक बता और कहें! ये तापसी पन्नू तो बिल्कुल कादर ख़ान हो गयी है। हर हफ़्ते इसकी पिच्चर आ जाती है। म्यूजिक की बात करें तो, पांच-पांच बंदों ने मिलकर गाने लिक्खे और पांच-पांच बंदों ने म्यूजिक दिया, इत्ती मेहनत के बाद दो गाने तो ऐसे बन ही गये, जिन्हें हम और आप सुन सकें। इसलिये हमारी ओर इस शादी को मिलते हैं शगुन के दो लड्डू! Laddoo2



ऐसी अन्य ख़बरें